ऑस्ट्रेलिया
NDIS बजट में कटौती से महिलाओं की सुरक्षा पर मंडराया खतरा: विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 05:37 am

ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा NDIS फंडिंग में प्रस्तावित कटौती को लेकर विकलांगता अधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इससे महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है।
ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय विकलांगता बीमा योजना (NDIS) के खर्चों को कम करने के हालिया प्रस्तावों ने देशभर में विकलांगता अधिकारों के समर्थकों और प्रभावित परिवारों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों और नागरिक अधिकार समूहों का तर्क है कि फंडिंग में प्रस्तावित कटौती और पात्रता नियमों में कड़े बदलावों से विशेष रूप से विकलांग महिलाएं असुरक्षित हो जाएंगी। जैसे-जैसे इन बदलावों को लागू करने की समयसीमा नजदीक आ रही है, समर्थक सरकार से इन फैसलों पर पुनर्विचार करने की पुरजोर अपील कर रहे हैं ताकि सबसे कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
संघीय सरकार का मुख्य तर्क यह है कि NDIS को आर्थिक रूप से 'टिकाऊ' बनाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। हालांकि, समर्थकों का कहना है कि 'स्थिरता' के नाम पर दी जाने वाली सुविधाओं में कमी करना मानवाधिकारों की अनदेखी करने जैसा है। कई विकलांग महिलाओं के लिए, NDIS द्वारा प्रदान किए गए सहायक कर्मचारी और सेवाएं केवल दैनिक कार्यों में मदद नहीं करते, बल्कि वे उनके लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का एकमात्र जरिया भी होते हैं। यह संपर्क उन्हें घरेलू हिंसा, सामाजिक अलगाव और शोषण जैसे गंभीर खतरों से बचाने में एक ढाल की तरह काम करता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में, यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय में कई ऐसे परिवार हैं जो अपने बच्चों या बुजुर्गों की देखभाल के लिए NDIS सेवाओं पर पूरी तरह निर्भर हैं। प्रवासी समुदायों में अक्सर विकलांगता से जुड़ी सामाजिक वर्जनाएं (stigma) देखी जाती हैं, जिसके कारण कई परिवार बाहरी मदद लेने में संकोच करते हैं। NDIS ने पिछले एक दशक में इन परिवारों को वह आवश्यक संसाधन और आत्मविश्वास प्रदान किया है जिससे वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके हैं। यदि फंडिंग में कटौती होती है, तो देखभाल का सारा बोझ एक बार फिर परिवार की महिलाओं पर आ जाएगा, जिससे उनके करियर, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
एडवोकेसी समूहों का कहना है कि सरकार इन सुधारों को बहुत तेजी से लागू करने की कोशिश कर रही है, जिसमें व्यक्तिगत जरूरतों की जटिलता को नजरअंदाज किया जा रहा है। विशेष रूप से हिंसा और दुर्व्यवहार के इतिहास वाली महिलाओं के लिए, योजना से मिलने वाला समर्थन उनकी जीवनरेखा है। अगर ये सेवाएं वापस ली जाती हैं, तो वे फिर से असुरक्षित वातावरण में रहने को मजबूर हो सकती हैं।
सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले दक्षिण एशियाई समुदाय के प्रतिनिधि अब स्थानीय सांसदों से संपर्क कर रहे हैं ताकि इन चिंताओं को संसद तक पहुंचाया जा सके। समुदाय का मानना है कि योजना में सुधार की आवश्यकता से कोई इनकार नहीं कर रहा, लेकिन यह सुधार उन लोगों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। आने वाले सप्ताह इस योजना के भविष्य और लाखों ऑस्ट्रेलियाई लोगों की सुरक्षा और गरिमा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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