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बेटियों के सशक्तीकरण का आधार बनी मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, 27 लाख से अधिक बालिकाओं को मिला लाभ

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 02:30 am
बेटियों के सशक्तीकरण का आधार बनी मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, 27 लाख से अधिक बालिकाओं को मिला लाभ

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने 27 लाख से अधिक बेटियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में नए आयाम स्थापित किए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' राज्य में बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। साल 2019 में शुरू की गई इस योजना के माध्यम से अब तक 27 लाख से अधिक बालिकाओं को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जा चुका है। यह योजना न केवल बालिकाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर में सुधार कर रही है, बल्कि समाज में व्याप्त लिंग भेद को समाप्त करने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित हुई है। इस योजना की संरचना इस प्रकार की गई है कि बालिका के जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई तक उसे आर्थिक संबल मिलता रहे। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को कुल छह चरणों में 25,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। पहले यह राशि 15,000 रुपये थी, जिसे राज्य सरकार ने हाल ही में बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाती है। योजना के छह चरणों को बहुत ही रणनीतिक ढंग से निर्धारित किया गया है। पहला चरण बालिका के जन्म पर शुरू होता है, जिसके बाद टीकाकरण, प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 1) में प्रवेश, कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश पर क्रमशः सहायता दी जाती है। अंतिम चरण तब आता है जब बालिका 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण कर किसी स्नातक या कम से कम दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी बेटी अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए भारत में हो रहे ये सामाजिक सुधार काफी महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में महिला साक्षरता और लिंगानुपात में सुधार के ये प्रयास न केवल राज्य की तस्वीर बदल रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की प्रतिबद्धता को भी मजबूती दे रहे हैं। यह योजना उन परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच है जो अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखते हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल और डिजिटल बनाया गया है। पात्रता की मुख्य शर्तों में परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और परिवार में अधिकतम दो ही बच्चे होने चाहिए। योजना की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके प्रति जबरदस्त जागरूकता देखी जा रही है, जिससे बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिली है।
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