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विदेशी शिक्षा के लिए वीजा अनिश्चितता के बावजूद एजुकेशन लोन की मांग में 20% का उछाल

ICN24 Newsroom 30 जुल॰ 2026, 04:36 pm
विदेशी शिक्षा के लिए वीजा अनिश्चितता के बावजूद एजुकेशन लोन की मांग में 20% का उछाल

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए वीजा नियमों में सख्ती और अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय छात्रों के बीच विदेशी शिक्षा ऋण की मांग में 20% की भारी वृद्धि देखी गई है।

विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने की आकांक्षा रखने वाले भारतीय छात्रों के लिए वीजा नियमों में बदलाव और बढ़ती सख्ती एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि, इन बाधाओं के बावजूद भारतीय परिवारों का हौसला कम नहीं हुआ है। हालिया वित्तीय आंकड़ों से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए लिए जाने वाले ऋण (एजुकेशन लोन) की मांग में 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय छात्र और उनके परिवार वैश्विक डिग्री को एक सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें भारी कर्ज क्यों न उठाना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफर लेटर मिलने और असल में विदेश जाकर पढ़ाई शुरू करने के बीच का जो फासला है, उसे अब 'क्रेडिट' यानी कर्ज ही भर रहा है। लंदन और मेलबर्न जैसे महंगे शहरों में शिक्षा की लागत और रहने के खर्चों में हुई बढ़ोतरी ने छात्रों को अधिक ऋण लेने के लिए मजबूर किया है। बैंकिंग क्षेत्र में, एजुकेशन लोन अब कंज्यूमर लेंडिंग के सबसे तेजी से बढ़ते हुए हिस्सों में से एक बन गया है। भारतीय बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नए-नए लोन उत्पाद पेश कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में बात करें, तो वहां की सरकार ने हाल ही में छात्र वीजा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। 'जेन्युइन स्टूडेंट' (GS) टेस्ट की शुरुआत और वीजा आवेदन शुल्क में हुई भारी बढ़ोतरी ने छात्रों के सामने वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसके बावजूद, ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए पसंदीदा स्थलों में से एक बना हुआ है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में बढ़ते किराए और मुद्रास्फीति ने छात्रों के बजट को प्रभावित किया है, जिसके कारण लोन की राशि में भी इजाफा हुआ है। अब छात्र केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि बढ़े हुए रहने के खर्च (Cost of Living) को कवर करने के लिए भी कर्ज ले रहे हैं। वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि वीजा अनिश्चितता के दौर में भी लोन की मांग बढ़ना इस बात का संकेत है कि भारतीय मध्यवर्ग अंतरराष्ट्रीय अनुभव और विदेशी वर्क परमिट को बहुत अधिक महत्व देता है। कई मामलों में, परिवारों ने अपनी बचत का उपयोग करने के बजाय ऋण लेना अधिक सुरक्षित समझा है, ताकि भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटा जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि छात्रों को कर्ज लेते समय ब्याज दरों और भविष्य में विदेशी मुद्रा की विनिमय दरों (Exchange Rates) को ध्यान में रखना चाहिए। निष्कर्ष के तौर पर, जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय नीतियां विदेशी छात्रों के लिए कड़ी होती जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय छात्रों की महत्वाकांक्षाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। 20 प्रतिशत का यह उछाल केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के संघर्ष और उम्मीद की कहानी है जो एक बेहतर भविष्य की तलाश में कर्ज के बोझ को भी सहने के लिए तैयार हैं। आने वाले समय में, यदि वीजा नियम और अधिक सख्त होते हैं, तो वित्तीय संस्थानों को अपनी ऋण नीतियों में और अधिक लचीलापन लाने की आवश्यकता हो सकती है।
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