ऑस्ट्रेलिया
'संदेहास्पद सम्मान': ऑस्ट्रेलिया में कंसल्टेंसी दिग्गजों की साख पर कड़ा प्रहार, सीनेटर ने जताई भारी नाराजगी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:07 am

ऑस्ट्रेलियाई संसदीय जांच के दौरान केपीएमजी के पूर्व प्रमुख के जवाबों ने विवाद खड़ा कर दिया है। सीनेटर ने बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों की साख और नैतिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों, जिन्हें 'बिग फोर' के नाम से जाना जाता है, पर चल रही संसदीय जांच ने एक नया मोड़ ले लिया है। एक हालिया सुनवाई के दौरान, सीनेटर डेबोरा ओ'नील ने केपीएमजी (KPMG) के पूर्व प्रमुख के बयानों पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह यह सुनकर 'स्तब्ध' (gobsmacked) रह गईं कि सार्वजनिक विश्वास और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर इन कंपनियों का रवैया कितना ढीला है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब केपीएमजी के पूर्व मुख्य कार्यकारी से सार्वजनिक विश्वास के बारे में सवाल पूछे गए। सीनेटर ओ'नील ने टिप्पणी की कि इन कंपनियों को मिलने वाला 'संदेहास्पद सम्मान' वास्तव में उनकी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। यह जांच पीडब्ल्यूसी (PwC) टैक्स लीक घोटाले के बाद शुरू हुई थी, जिसने पूरे कंसल्टेंसी सेक्टर को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह समस्या केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उद्योग की संस्कृति में गहराई तक समाई हुई है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया के पेशेवर सेवा क्षेत्र (Professional Services Sector) में भारतीय प्रवासियों और पेशेवरों की एक बड़ी संख्या कार्यरत है। केपीएमजी, पीडब्ल्यूसी, ईवाई (EY) और डेलॉयट (Deloitte) जैसी कंपनियां न केवल हजारों भारतीयों को रोजगार देती हैं, बल्कि कई युवा भारतीय पेशेवर इन फर्मों के माध्यम से ही अपनी करियर की शुरुआत करते हैं। इन कंपनियों की साख पर आंच आने का सीधा असर उद्योग में भविष्य की नौकरियों, वर्क कल्चर और पेशेवरों की प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।
संसदीय समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए इन निजी फर्मों पर अत्यधिक निर्भरता ने पारदर्शिता को कम कर दिया है। सीनेटर ओ'नील ने जोर देकर कहा कि करदाताओं के पैसे का उपयोग करने वाली इन कंपनियों को सार्वजनिक जवाबदेही के उच्च मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में कंसल्टेंसी फर्मों के लिए नियम और अधिक सख्त किए जा सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे केवल मुनाफे के लिए सार्वजनिक हितों से समझौता न करें।
वर्तमान में, सरकार इन कंपनियों के संचालन के तरीकों और उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सलाह की निष्पक्षता की समीक्षा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'ट्रस्ट डेफिसिट' (विश्वास की कमी) को दूर करने के लिए केवल माफी मांगना काफी नहीं होगा, बल्कि इन कंपनियों को अपनी पूरी कार्य संस्कृति में बदलाव लाना होगा। आने वाले महीनों में इस जांच के परिणामों से ऑस्ट्रेलिया के कॉर्पोरेट और सरकारी परिदृश्य में बड़े बदलावों की उम्मीद है।
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