राजनीति
‘फोन मत करो...’, जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके ने घर वालों से क्यों कही यह बात? पिता ने किया खुलासा
ICN24 Newsroom 27 जुल॰ 2026, 10:37 pm

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके के पिता ने उनके संघर्ष और सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा किया है।
नई दिल्ली: भारत की राजधानी के जंतर-मंतर पर छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला दिया है। शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों और छात्रों की मांगों को लेकर जारी इस आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके स्थान पर अब प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और उसके प्रमुख अभिजीत दीपके की भूमिका सबसे प्रमुख रही है। हालांकि, इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक निजी और भावुक पहलू भी सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है।
अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव ने हाल ही में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनके बेटे ने आंदोलन के दौरान परिवार से संपर्क सीमित कर दिया था। भगवानराव के अनुसार, अभिजीत ने स्पष्ट रूप से घर वालों से कहा था, "मुझे फोन मत करो..."। इसके पीछे का कारण कोई पारिवारिक अनबन नहीं, बल्कि आंदोलन की गंभीरता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं। जंतर-मंतर पर जिस तरह से पुलिस बल की तैनाती थी और हिरासत में लिए जाने का खतरा बना हुआ था, उसे देखते हुए अभिजीत नहीं चाहते थे कि उनके माता-पिता किसी भी तरह की मानसिक परेशानी या डर का सामना करें।
भगवानराव ने बताया कि अभिजीत इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे और उन्हें अंदेशा था कि पुलिस उनका फोन जब्त कर सकती है या उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसे में बार-बार फोन आने से न केवल प्रदर्शन की रणनीति पर असर पड़ता, बल्कि उनके माता-पिता की चिंता भी बढ़ जाती। अभिजीत का मानना था कि मैदान में डटे रहकर छात्रों की आवाज उठाना उस समय फोन पर बात करने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्व रखती है, क्योंकि वहां रह रहे भारतीय छात्र और पेशेवर अक्सर भारत की शिक्षा नीति और छात्र आंदोलनों पर गहरी नजर रखते हैं। भारत में शैक्षिक सुधारों की मांग और नेतृत्व परिवर्तन का सीधा असर उन प्रवासी परिवारों पर पड़ता है जिनके बच्चे अभी भी भारत में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
अभिजीत दीपके और उनकी टीम द्वारा संचालित 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने इस प्रदर्शन को एक नई दिशा दी है। जंतर-मंतर की सड़कों पर नारों और पोस्टर के साथ खड़े इन युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे नीतिगत निर्णयों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी के पदभार संभालने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नया नेतृत्व छात्रों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार करता है।
फिलहाल, भगवानराव दीपके अपने बेटे के साहस पर गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पिता के तौर पर चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन जब आपका बच्चा देश के भविष्य के लिए लड़ रहा हो, तो उसकी सुरक्षा की प्रार्थना करना ही एकमात्र रास्ता बचता है। अभिजीत की यह अपील कि 'फोन मत करो', दरअसल एक आंदोलनकारी की अपनी जिम्मेदारी के प्रति एकाग्रता को दर्शाती है।
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