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ट्रंप का बड़ा दावा: इस सप्ताहांत ईरान के साथ हो सकता है ऐतिहासिक शांति समझौता

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 09:31 am
ट्रंप का बड़ा दावा: इस सप्ताहांत ईरान के साथ हो सकता है ऐतिहासिक शांति समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियारों का त्याग करने पर सहमत हो गया है, जिसके बाद इस सप्ताहांत यूरोप में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े उलटफेर का संकेत देते हुए घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता इस सप्ताहांत तक अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए यूरोप में एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा सकता है। राष्ट्रपति ने दावा किया कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित न करने की शर्त पर सहमत हो गया है, जिसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों और नाकाबंदी को तुरंत हटा लेगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब समाप्त होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए यह समझौता अत्यंत आवश्यक है और ईरान के नेतृत्व ने अंततः बातचीत की मेज पर आने का फैसला किया है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनयिक गलियारों में इस संभावित समझौते को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम का प्रभाव वैश्विक भू-राजनीति और विशेष रूप से मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन पर पड़ना तय है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ गहरे रणनीतिक संबंध हैं और मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को प्रभावित करती है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए, जो अक्सर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से सीधे प्रभावित होते हैं, यह समझौता व्यापार और यात्रा के नए रास्ते खोल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल की सबसे बड़ी विदेश नीति उपलब्धि मानी जाएगी। हालांकि, आलोचक अभी भी सतर्क हैं। उनका कहना है कि ईरान के साथ पहले हुए समझौतों का इतिहास जटिल रहा है और जब तक औपचारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। भारतीय दृष्टिकोण से, ईरान के साथ संबंधों में सुधार भारत की ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसी रणनीतिक परियोजनाओं के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस सप्ताहांत यूरोप में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जो दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करने की क्षमता रखती है।
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