राजनीति
धार भोजशाला मामला: सुप्रीम कोर्ट में सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ने की मांग करेगा मुस्लिम पक्ष
ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 07:31 pm

धार के ऐतिहासिक भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष ने अपनी कानूनी रणनीति तेज कर दी है। कमल मौला वेलफेयर सोसायटी सुप्रीम कोर्ट से सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का आग्रह करेगी।
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संभावित सुनवाई से पहले, मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली 'कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी' ने अपनी कानूनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। सोसायटी के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे 13 जुलाई को अदालत के समक्ष इस मामले का विशेष उल्लेख (mentioning) करेंगे और मांग करेंगे कि इस प्रकरण से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर उनकी सुनवाई की जाए।
भोजशाला का यह विवाद दशकों पुराना है, जिसे हिंदू पक्ष वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान में यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। मुस्लिम पक्ष की रणनीति यह है कि अलग-अलग अदालतों और बेंचों में चल रही याचिकाओं के कारण कानूनी जटिलताएं बढ़ रही हैं, इसलिए सभी संबंधित मामलों को एक ही छत के नीचे सुना जाना चाहिए ताकि किसी भी विरोधाभासी निर्णय से बचा जा सके।
इससे पहले, इंदौर की उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण (ASI Survey) का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वेक्षण पर पूरी तरह से रोक तो नहीं लगाई, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया था कि सर्वेक्षण के दौरान परिसर की मूल संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए और न ही वहां की वर्तमान धार्मिक व्यवस्थाओं में कोई बदलाव किया जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर भारत की न्यायिक प्रक्रिया और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के नजरिए से महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीयों के बीच अक्सर भारत के ऐतिहासिक स्थलों और उनके कानूनी विवादों को लेकर गहरी दिलचस्पी रहती है। इस मामले का परिणाम न केवल धार बल्कि देश के अन्य समान विवादों के लिए भी एक नजीर पेश कर सकता है।
मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि 1902-03 के गैजेटियर और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह स्थान एक मस्जिद है। वहीं, हिंदू पक्ष 'महाराजा भोज' द्वारा निर्मित सरस्वती सदन होने के प्रमाण प्रस्तुत करता है। फिलहाल, सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि क्या सभी याचिकाओं को एक साथ सुना जाएगा और एएसआई की रिपोर्ट का भविष्य क्या होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि याचिकाओं को क्लब करने की मांग सुनवाई की प्रक्रिया को गति दे सकती है।
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