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शिव की भक्ति संपूर्ण मनोरथों को देने वाली: शास्त्री का आध्यात्मिक संदेश
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 08:37 am

शास्त्री जी ने आध्यात्मिक प्रवचन के दौरान कहा कि भगवान शिव की सच्ची भक्ति से मनुष्य के समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं और जीवन में शांति आती है।
धर्म और आध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता शास्त्री जी ने भक्तों को शिव भक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि शिव की आराधना केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह आत्मा के शुद्धिकरण का एक सशक्त माध्यम है। शास्त्री जी के अनुसार, जो भक्त निस्वार्थ भाव से महादेव की शरण में जाता है, उसके जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है और उसके सभी शुभ मनोरथ पूर्ण होते हैं।
शास्त्री जी ने जोर देते हुए कहा कि भगवान शिव 'आशुतोष' हैं, जिसका अर्थ है जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। शिव की पूजा के लिए किसी भव्य आयोजन की आवश्यकता नहीं होती; वे केवल एक लोटा जल और बेलपत्र से भी प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। वर्तमान के भागदौड़ भरे जीवन में, जहाँ तनाव और अशांति व्याप्त है, शिव का ध्यान व्यक्ति को मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। शास्त्री जी ने बताया कि शिव का स्वरूप हमें विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रहने की प्रेरणा देता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए इस संदेश की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहना एक बड़ी चुनौती होती है। शास्त्री जी ने कहा कि सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में बसे भारतीयों को अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय ईश्वर की आराधना के लिए अवश्य निकालना चाहिए। यहाँ के विभिन्न शिव मंदिरों, जैसे मिन्टो स्थित मुक्तेश्वर मंदिर या विक्टोरिया के श्री शिव विष्णु मंदिर, में होने वाले धार्मिक आयोजन न केवल आस्था का केंद्र हैं, बल्कि यह अगली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी हैं।
प्रवचन के दौरान उन्होंने 'पंचाक्षरी मंत्र' - 'ॐ नमः शिवाय' के जाप के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस मंत्र में सृष्टि के पांचों तत्वों का समावेश है और इसका निरंतर जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे धर्म को केवल परंपरा न समझें, बल्कि इसे एक जीवन पद्धति के रूप में अपनाएं जो उन्हें अनुशासन और नैतिक मूल्यों की सीख देता है।
अंत में शास्त्री जी ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि भक्ति का मार्ग सरल है, बशर्ते उसमें अटूट विश्वास हो। शिव की भक्ति मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर करुणा और प्रेम की ओर ले जाती है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जो भक्त पूरी श्रद्धा के साथ महादेव का स्मरण करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। इस आध्यात्मिक चर्चा ने वहां उपस्थित और ऑनलाइन माध्यम से जुड़े सैकड़ों श्रद्धालुओं को भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
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