राजनीति
उपमुख्यमंत्री ने उमर अब्दुल्ला का भरोसा तोड़ा: नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक जावेद इकबाल का गंभीर आरोप
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 06:41 am
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक जावेद इकबाल चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पर तीखा हमला करते हुए उन पर मुख्यमंत्री और जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायक जावेद इकबाल चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पर सीधे तौर पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने न केवल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भरोसे को तोड़ा है, बल्कि उस जनता के साथ भी छल किया है जिसने भारी उम्मीदों के साथ इस सरकार को चुना था।
जावेद इकबाल चौधरी का यह बयान उस समय आया है जब राज्य में प्रशासनिक स्थिरता और विकास को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ साठगांठ कर रहे हैं और उन ताकतों से हाथ मिला लिया है जो मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विजन के खिलाफ काम कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियां पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता को दर्शाती हैं और इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
विधायक ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बड़ी उदारता और विश्वास के साथ उपमुख्यमंत्री को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, विधायक के अनुसार, बदले में उपमुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ ही गुटबाजी शुरू कर दी है। चौधरी ने आगाह किया कि जनता सब देख रही है और इस तरह का व्यवहार उन लोगों का अपमान है जिन्होंने एक स्थिर और विश्वसनीय नेतृत्व के लिए मतदान किया था।
यह राजनीतिक घटनाक्रम केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे कश्मीरी प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के लोग राज्य में शांति और सुशासन की उम्मीद करते हैं। इस तरह के आंतरिक मतभेदों से प्रवासी भारतीयों में चिंता पैदा होती है, क्योंकि वे अपनी मातृभूमि में निरंतर विकास और राजनीतिक स्पष्टता देखना चाहते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर उठने वाली ये आवाजें गठबंधन सरकार की आंतरिक चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं। यदि इन मतभेदों को समय रहते सुलझाया नहीं गया, तो इसका असर प्रशासनिक कार्यों पर पड़ सकता है। फिलहाल, उपमुख्यमंत्री के कार्यालय या नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस मुद्दे पर कोई कड़ा कदम उठाते हैं या फिर पार्टी के भीतर समन्वय बिठाने की कोशिश की जाती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि वे जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्थिरता को क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि से जोड़कर देखते हैं।
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