राजनीति
प्रशासनिक फेरबदल की मांग: सिवानी को भिवानी से हटाकर हिसार जिले में शामिल करने की उठी आवाज
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 07:01 am

हरियाणा के सिवानी क्षेत्र के निवासी लंबे समय से खुद को भिवानी से हटाकर हिसार जिले में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, ताकि बेहतर प्रशासनिक पहुंच और विकास सुनिश्चित हो सके।
हरियाणा के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की एक पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले सिवानी उपमंडल के निवासियों ने सरकार से पुरजोर अपील की है कि उनके क्षेत्र को भिवानी से अलग कर हिसार जिले में शामिल किया जाए। यह मांग केवल क्षेत्रीय राजनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे भौगोलिक सुगमता और बेहतर जनसुविधाओं का तर्क दिया जा रहा है।
वरिष्ठ स्तंभकार डॉ. सत्यवान सौरभ के अनुसार, लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और प्रशासनिक सुविधा के तालमेल का नाम है। सिवानी के लोगों का तर्क है कि हिसार उनके लिए भिवानी की तुलना में अधिक निकट और सुलभ है। वर्तमान में, सिवानी के निवासियों को जिला मुख्यालय से संबंधित कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों का अपव्यय होता है।
ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो सिवानी का जुड़ाव हिसार के साथ अधिक रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए यहाँ के लोग मुख्य रूप से हिसार पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्निर्धारण जनसंख्या वृद्धि और विकास की बदलती जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। यदि सिवानी को हिसार में शामिल किया जाता है, तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सरल होगा, बल्कि स्थानीय विकास को भी नई गति मिलेगी।
इस मुद्दे का महत्व प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हरियाणा मूल के लोगों के लिए भी है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी पैतृक भूमि में निवेश और विकास परियोजनाओं में रुचि रखते हैं। प्रशासनिक जटिलताओं के कारण कई बार विकास कार्य रुक जाते हैं। सुव्यवस्थित जिला प्रबंधन से न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ होता है, बल्कि विदेशी निवेशकों और प्रवासियों के लिए भी अपनी जड़ों से जुड़ना और वहां विकास कार्यों में योगदान देना आसान हो जाता है।
फिलहाल, 'भिवानी से इनकार, चाहिए जिला हिसार' का नारा स्थानीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले रहा है। अब देखना यह होगा कि हरियाणा सरकार इस न्यायसंगत मांग पर क्या रुख अपनाती है। प्रशासनिक सुधारों के इस दौर में, जनभावनाओं को प्राथमिकता देना किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए अनिवार्य हो जाता है।
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