राजनीति
दिल्ली दंगे: ताहिर हुसैन दोषी करार, भाजपा ने तत्कालीन आप सरकार पर साधा निशाना
ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 10:31 pm
दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दंगों में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है, जिसके बाद भाजपा ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया है। इस न्यायिक निर्णय ने राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए तत्कालीन आप सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि हिंसा भड़काने वालों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।
फरवरी 2020 में जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के आधिकारिक दौरे पर थे, उसी दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भीषण सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे। ताहिर हुसैन पर आरोप था कि उन्होंने दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व किया और हिंसा फैलाने के लिए अपने घर का इस्तेमाल एक ठिकाने के रूप में किया, जहां से पत्थर और पेट्रोल बम फेंके गए थे।
अदालत के फैसले के तुरंत बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। भाजपा के प्रवक्ताओं का कहना है कि ताहिर हुसैन केवल एक मोहरा थे और उन्हें तत्कालीन सत्ता का पूरा समर्थन प्राप्त था। भाजपा ने मांग की है कि आप को उन सभी पीड़ितों से माफी मांगनी चाहिए जिन्होंने इस प्रायोजित हिंसा में अपने परिजनों और संपत्ति को खोया है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और उन्होंने ताहिर हुसैन को पार्टी से बहुत पहले ही निलंबित कर दिया था। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि भाजपा इसे तुष्टीकरण की राजनीति के उदाहरण के रूप में पेश कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय अक्सर भारत की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर गहरी नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों का मानना है कि भारत की न्यायपालिका द्वारा ऐसे संवेदनशील मामलों में समय पर फैसला सुनाना कानून के शासन के प्रति विश्वास को मजबूत करता है। समुदाय के बीच इस बात की भी चर्चा है कि कैसे राजनीतिक लाभ के लिए सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिशें की जाती हैं।
न्यायालय अब आने वाले दिनों में ताहिर हुसैन की सजा की अवधि पर फैसला सुनाएगा। तब तक, यह मुद्दा भारत की राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रहने की संभावना है, जिससे दिल्ली सरकार की जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।
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