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दिल्ली में बिजली सुधार: दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के लिए 97.5 मेगावाट बैटरी स्टोरेज योजना को मंजूरी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 06:54 am
दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने BSES राजधानी की 97.5 मेगावाट की बैटरी स्टोरेज परियोजना को मंजूरी दी, जिससे 2.5 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
दिल्ली की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) की एक महत्वाकांक्षी योजना को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस योजना के तहत दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 97.5 मेगावाट क्षमता के पांच बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य राजधानी के बिजली ग्रिड की स्थिरता को बढ़ाना और मांग के समय निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के लगभग 2.5 लाख निवासियों को सीधा लाभ होगा। बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल ग्रिड की विश्वसनीयता को सुधारेगी, बल्कि ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन में भी मदद करेगी। बैटरी स्टोरेज सिस्टम की मदद से उस समय बिजली जमा की जा सकती है जब मांग कम हो और उसका उपयोग पीक ऑवर्स (सबसे अधिक मांग वाले समय) के दौरान किया जा सकता है। इससे बिजली कटौती की समस्या कम होगी और सौर ऊर्जा जैसे अस्थिर स्रोतों का प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अनुमानों के अनुसार, इन पांच बैटरी स्टोरेज प्रणालियों के संचालन से सालाना लगभग 88 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लाभ होने की उम्मीद है। यह बचत अंततः बिजली की दरों को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने में सहायक सिद्ध होगी। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से उत्साहजनक है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया खुद विश्व स्तर पर बैटरी स्टोरेज तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। भारत की राजधानी में इस तरह के आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास वैश्विक मानकों के अनुरूप है।
पर्यावरणीय प्रभाव की बात करें तो, यह कदम दिल्ली के 'क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन' यानी स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के संकल्प को मजबूत करता है। बीईएसएस (BESS) तकनीक कोयले और अन्य पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। दिल्ली जैसे महानगर के लिए, जो अक्सर प्रदूषण और ऊर्जा की बढ़ती मांग की चुनौतियों से जूझता है, यह परियोजना एक स्थायी समाधान पेश करती है।
आने वाले महीनों में इन प्रणालियों की स्थापना का कार्य शुरू होने की उम्मीद है। यह परियोजना न केवल दिल्ली के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है। ग्रिड के आधुनिकीकरण और हरित ऊर्जा की दिशा में दिल्ली सरकार और विनियामक संस्थाओं का यह साझा प्रयास आने वाले समय में शहर की ऊर्जा सुरक्षा को एक नई दिशा देगा।
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