राजनीति
दिल्ली होटल अग्निकांड: पुलिस जांच के घेरे में, क्या रसूखदारों को बचाने के लिए रसोइए को बनाया गया 'बलि का बकरा'?
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 11:30 pm
मालवीय नगर अग्निकांड में 23 मौतों के बाद पुलिस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि असली दोषियों को बचाने के लिए बुजुर्ग रसोइए को फंसाया गया है।
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिस स्टे’ होटल में हुए भीषण अग्निकांड ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 3 जून को हुए इस हादसे में अब तक 23 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें अग्रवाल परिवार के 8 सदस्यों सहित नाइजीरिया, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों के 15 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस की तफ्तीश पर अब नागरिक समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि रसूखदार होटल मालिकों, नगर निगम (एमसीडी) के भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए होटल के 65 वर्षीय रसोइए केशव सिंह नेगी को ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है।
जांच रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इस त्रासदी के लिए मुख्य रूप से लापरवाही का हवाला देते हुए नेगी को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि एक मामूली कर्मचारी सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकता। यह सर्वविदित है कि दिल्ली के कई इलाकों में होटल और गेस्ट हाउस बिना वैध फायर क्लीयरेंस और सुरक्षा ऑडिट के चल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह हादसा केवल एक रसोइए की गलती नहीं, बल्कि व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का परिणाम है, जहां रसूखदार लोग नियमों को ताक पर रखकर व्यापार करते हैं।
इस घटना ने विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। अक्सर एनआरआई परिवार भारत दौरे के समय सुरक्षा और बजट के आधार पर दिल्ली के ऐसे होटलों का चयन करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अक्सर चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) या पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए दिल्ली आते हैं। इस हादसे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या दिल्ली के पॉश इलाकों में भी ठहरना सुरक्षित है? यदि नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाली एजेंसियां ही दोषियों को संरक्षण देंगी, तो सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
घटना के पीड़ितों में भारी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल थे, जो भारत के पर्यटन और कूटनीतिक छवि पर भी गहरा आघात है। नागरिक समूहों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक होटल के मालिकों और उन अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती जिन्होंने इस असुरक्षित इमारत को संचालित करने की अनुमति दी, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। फिलहाल, केशव सिंह नेगी की गिरफ्तारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है और मामले ने अब राजनीतिक मोड़ लेना शुरू कर दिया है।
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