राजनीति
जापान की E-10 में देरी: भारत 2027 तक लॉन्च करेगा स्वदेशी बुलेट ट्रेन 'B-28'
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 03:35 pm

जापान से शिंकानसेन ट्रेनों की आपूर्ति में देरी के बीच, भारत अब अपनी स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन B-28 तैयार कर रहा है, जो 2027 तक ट्रैक पर उतर सकती है।
भारत की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। जापान से ई-10 (E-10) सीरीज की शिंकानसेन ट्रेनों की आपूर्ति में हो रही देरी को देखते हुए, भारत सरकार ने अब आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि भारत अपनी स्वदेशी तकनीक से निर्मित बुलेट ट्रेन, जिसे 'B-28' नाम दिया गया है, को साल 2027 तक पटरी पर उतारने की योजना बना रहा है। यह कदम न केवल परियोजना की समयसीमा को सुरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की विनिर्माण क्षमता का प्रदर्शन भी करेगा।
प्रारंभिक योजना के अनुसार, इस कॉरिडोर के लिए जापान से शिंकानसेन तकनीक आयात की जानी थी। हालांकि, लागत के मुद्दों और तकनीकी तालमेल की चुनौतियों के कारण जापानी कंसोर्टियम के साथ बातचीत लंबी खिंच गई। इसे देखते हुए, रेल मंत्रालय ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) को स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनों के निर्माण का जिम्मा सौंपा है। 'B-28' को वंदे भारत प्लेटफॉर्म की सफलता के आधार पर विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसकी गति और सुरक्षा मानक अंतरराष्ट्रीय बुलेट ट्रेनों के समकक्ष होंगे।
सरकार द्वारा साझा किए गए प्लान के अनुसार, B-28 की परिचालन गति 250 से 280 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहने की उम्मीद है। हालांकि डिजाइन के स्तर पर इसे 300 किमी/घंटा से अधिक की गति के लिए तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगले साल यानी 2025 तक इस ट्रेन का प्रोटोटाइप परीक्षण के लिए तैयार हो सकता है। यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारतीय रेल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी, क्योंकि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और लागत में भी भारी बचत होने की उम्मीद है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से उत्साहजनक है। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में सिडनी, मेलबर्न और ब्रिसबेन के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की चर्चा दशकों से चल रही है, भारत का यह 'देसी' समाधान एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। मेलबर्न और सिडनी में बसे कई भारतीय इंजीनियर और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ इस बदलाव को भारत की बढ़ती इंजीनियरिंग शक्ति के प्रमाण के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी बुलेट ट्रेन न केवल मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को घटाकर 2 घंटे कर देगी, बल्कि यह भविष्य के अन्य प्रस्तावित हाई-स्पीड रूटों (जैसे दिल्ली-वाराणसी और चेन्नई-मैसूर) के लिए भी आधार तैयार करेगी। भले ही जापान की E-10 सीरीज बाद में इस बेड़े में शामिल हो, लेकिन 2027 में 'B-28' का ट्रैक पर उतरना भारतीय रेलवे के स्वर्णिम युग की शुरुआत माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचे का काम युद्धस्तर पर जारी है और सूरत-बिलिमोरा खंड पर पहला परीक्षण जल्द ही आयोजित किया जाएगा।
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