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3 जुलाई 2026 का पंचांग: मां लक्ष्मी की आराधना से समृद्धि का योग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का सटीक समय
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 01:31 pm

3 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण तृतीया और चतुर्थी का संयोग है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा और शुभ मुहूर्त का पालन जीवन में सुख-समृद्धि ला सकता है।
हिंदू धर्म में समय की गणना और ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व है। पंचांग के माध्यम से हम न केवल दिन के शुभ और अशुभ समय को जानते हैं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक यात्रा को भी सुगम बनाते हैं। 3 जुलाई 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जो सुबह 11:20 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात चतुर्थी तिथि का प्रारंभ होगा।
पंचांग के अनुसार, इस दिन श्रवण नक्षत्र सुबह 11:46 बजे तक प्रभावी रहेगा। नक्षत्रों की गणना में श्रवण को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सुनने और ज्ञान अर्जन करने की शक्ति का प्रतीक है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहने का प्रयास करते हैं, इन तिथियों का पालन करना सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। शुक्रवार का दिन विशेष रूप से धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजित मुहूर्त इस दिन का सबसे उत्तम समय है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत या निवेश के लिए यह समय श्रेष्ठ माना जाता है। हालांकि, भक्तों को 'राहुकाल' का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। राहुकाल के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या नई यात्रा की शुरुआत से बचना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय में किए गए कार्यों में विघ्न आने की संभावना रहती है। विशेष रूप से मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय समय के अनुसार पंचांग गणना में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।
आषाढ़ के महीने में लक्ष्मी पूजन का विशेष फल मिलता है। जो लोग व्यापार में उन्नति या पारिवारिक शांति की कामना रखते हैं, उन्हें इस दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना चाहिए और सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों में अक्सर काम की व्यस्तता के कारण पूजा का समय निकालना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन पंचांग की सही जानकारी होने से वे अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं।
अंत में, यह समझना आवश्यक है कि पंचांग केवल तिथियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ हमारे तालमेल को दर्शाता है। 3 जुलाई को चंद्रमा की स्थिति और नक्षत्रों का योग साधना और ध्यान के लिए भी अनुकूल है। यदि आप किसी विशेष अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो सुबह के समय का उपयोग करना अधिक फलदायी होगा।
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