ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग
मुंबई की धड़कन सीएसएमटी के 138 साल: पत्थरों पर उकेरी गई 16 जातियों की कला और ₹16 लाख का वह ऐतिहासिक सफर
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 03:25 am

मुंबई का गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) अपनी स्थापना के 138 साल पूरे कर चुका है। जानिए ₹16 लाख में बनी इस इमारत की अनोखी कहानी।
मुंबई की पहचान और भारतीय रेल के गौरव का प्रतीक, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), ने अपनी स्थापना के 138 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। 20 जून 1888 को जब इस स्टेशन के दरवाजे पहली बार आम जनता के लिए खोले गए थे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह इमारत न केवल एक रेलवे स्टेशन, बल्कि वैश्विक वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना बन जाएगी। तत्कालीन 'विक्टोरिया टर्मिनस' के नाम से मशहूर यह स्टेशन आज यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और मुंबई की भागती-दौड़ती जिंदगी की धड़कन कहलाता है।
इस ऐतिहासिक इमारत के निर्माण की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है जितनी इसकी वास्तुकला। इसे बनाने में लगभग 10 साल का समय लगा और उस दौर में इसकी कुल लागत 16.14 लाख रुपये आई थी। ब्रिटिश वास्तुकार फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस ने इसे डिजाइन किया था, जिन्होंने विक्टोरियन गोथिक पुनरुद्धार शैली और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला का एक अद्भुत मेल प्रस्तुत किया। आज के दौर में जब हम करोड़ों के बजट वाली इमारतों को देखते हैं, तो 19वीं सदी के अंत में मात्र 16 लाख में तैयार हुई यह भव्य संरचना हमें अचंभित कर देती है।
सीएसएमटी की सबसे बड़ी विशेषता इसके पत्थरों में छिपी कलाकारी है। स्टेशन की मुख्य इमारत और इसके स्तंभों पर 16 अलग-अलग समुदायों और जातियों के चेहरों को बारीकी से उकेरा गया है। यह उस समय की विविधता और भारतीय समाज के ताने-बाने को दर्शाने का एक प्रयास था। इन नक्काशीदार पत्थरों में आपको न केवल मानव चेहरे, बल्कि जानवरों, पक्षियों और वनस्पतियों की आकृतियां भी देखने को मिलेंगी, जो उस समय के शिल्पकारों के कौशल का प्रमाण हैं। इमारत के गुंबद पर लगी 'प्रोग्रेस' (प्रगति) की मूर्ति इस बात का प्रतीक है कि यह शहर हमेशा आगे बढ़ने में विश्वास रखता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मुंबई से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए सीएसएमटी केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि उनकी यादों का एक अहम हिस्सा है। मेलबर्न के फ्लिंडर्स स्ट्रीट या सिडनी के सेंट्रल स्टेशन की तरह, सीएसएमटी भी प्रवासियों के लिए अपने घर की पहली झलक हुआ करता था। कई भारतीयों के लिए विदेश जाने की यात्रा इसी स्टेशन से शुरू हुई थी।
आज सीएसएमटी से रोजाना सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं और लाखों यात्री सफर करते हैं। 2008 के आतंकी हमलों का गवाह रहने के बावजूद, यह स्टेशन अपनी मजबूती और जीवंतता के साथ खड़ा है। समय बदला, तकनीक बदली और स्टेशन का नाम भी बदला, लेकिन इसकी भव्यता आज भी वैसी ही है। 138 साल बाद भी यह इमारत मुंबई के इतिहास, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी बनी हुई है।
संबंधित ख़बरें
ब्रेकिंगब्रेकिंग
पद्म पुरस्कार 2026: विजय अमृतराज, ममूटी और रोहित शर्मा सहित 65 हस्तियों को सम्मानित करेंगी राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में टेनिस दिग्गज विजय अमृतराज, अभिनेता ममूटी और क्रिकेटर रोहित शर्मा सहित 65 विभूतियों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से नवाजेंगी।
21 जून 2026, 03:56 am

ब्रेकिंगब्रेकिंग
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर तेलंगाना कांग्रेस का 'सत्याग्रह', लोकतंत्र बचाने की पुकार
तेलंगाना कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के विरोध में 'सत्याग्रह' शुरू किया है, जिसमें भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया गया है।
21 जून 2026, 03:40 am

ब्रेकिंगब्रेकिंग
साहिबगंज: संध्या कॉलेज में सरकारी लिपिकों की लेखा परीक्षा संपन्न, प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बढ़ते कदम
साहिबगंज के संध्या कॉलेज में जिला एवं अनुमंडल लिपिकों की अर्धवार्षिक लेखा परीक्षा के शुरुआती दो पत्र शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।
21 जून 2026, 03:10 am
