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विपक्षी एकजुटता की धुरी बनेंगे राहुल गांधी: कांग्रेस ने तेज की गठबंधन की कवायद

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 11:31 am
विपक्षी एकजुटता की धुरी बनेंगे राहुल गांधी: कांग्रेस ने तेज की गठबंधन की कवायद

कांग्रेस पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की रणनीति बनाई है, जिसमें राहुल गांधी को मुख्य चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है।

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में आगामी आम चुनावों की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस पार्टी ने विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह राहुल गांधी को इस प्रस्तावित गठबंधन की मुख्य धुरी के रूप में देख रही है। कांग्रेस का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए का मुकाबला करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की एकजुटता अनिवार्य है, और राहुल गांधी इस समन्वय के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हैं। हाल के विधानसभा चुनावों के परिणामों और क्षेत्रीय दलों के भीतर चल रही उथल-पुथल के बीच, कांग्रेस अब खुद को एक बड़े भाई की भूमिका में पुनः स्थापित करने की कोशिश कर रही है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों के साथ समीकरणों को देखते हुए, कांग्रेस की यह रणनीति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का तर्क है कि बिना कांग्रेस के किसी भी विपक्षी मोर्चे का कोई ठोस राष्ट्रीय आधार नहीं हो सकता। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की यह राजनीतिक हलचल विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक संतुलन को लेकर चर्चा करते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई संगठनों का मानना है कि एक मजबूत विपक्ष भारत की शासन व्यवस्था और वैश्विक छवि के लिए आवश्यक है। राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष की एकजुटता प्रवासी भारतीयों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसका सीधा असर भारत की विदेश नीति और आर्थिक सुधारों पर पड़ता है। विपक्षी एकता की राह हालांकि इतनी आसान नहीं है। क्षेत्रीय दलों की अपनी महत्वाकांक्षाएं और स्थानीय समीकरण अक्सर कांग्रेस के नेतृत्व के आड़े आते रहे हैं। फिर भी, कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' और उनके हालिया तेवरों ने उन्हें विपक्ष के सबसे मुखर चेहरे के रूप में स्थापित किया है। पार्टी अब अन्य विपक्षी दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत का दौर शुरू कर चुकी है ताकि एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम (Common Minimum Program) पर सहमति बन सके। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी, नीतीश कुमार और शरद पवार जैसे मंझे हुए राजनीतिज्ञ राहुल गांधी के नेतृत्व को किस हद तक स्वीकार करते हैं। यदि कांग्रेस विपक्षी दलों को एक साथ लाने में सफल रहती है, तो यह भारतीय राजनीति के भविष्य के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।
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