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वीबीएसए विधेयक पर जयराम रमेश ने उठाए सवाल, कहा- यह भारत के संघीय ढांचे का उल्लंघन है

ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 04:31 am
वीबीएसए विधेयक पर जयराम रमेश ने उठाए सवाल, कहा- यह भारत के संघीय ढांचे का उल्लंघन है

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के वीबीएसए विधेयक की आलोचना करते हुए इसे राज्यों के अधिकारों का हनन बताया है। उन्होंने एनडीए शासित राज्यों से भी इसका विरोध करने की अपील की।

भारतीय राजनीति में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों के बंटवारे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने प्रस्तावित 'वीबीएसए' (VBSA) विधेयक पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे भारत के संवैधानिक संघीय ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। रमेश ने इस विधेयक को 'वेरी बैड शिक्षा एक्ट' (Very Bad Shiksha Act) करार देते हुए आरोप लगाया है कि इसके माध्यम से केंद्र सरकार राज्यों के शिक्षा संबंधी अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रही है। नई दिल्ली में एक आधिकारिक बयान के दौरान जयराम रमेश ने कहा कि यह विधेयक न केवल राज्यों की स्वायत्तता पर हमला है, बल्कि यह बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा परिकल्पित संविधान की मूल भावना के भी विपरीत है। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिस पर केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार है। हालांकि, इस नए विधेयक के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार ऐसी शक्तियां अपने हाथ में लेना चाहती है जो पारंपरिक रूप से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में रही हैं। जयराम रमेश ने केवल विपक्ष शासित राज्यों से ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों और भाजपा शासित राज्यों से भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी शैक्षणिक नीतियों को निर्धारित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को केवल स्थानीय प्रशासन ही बेहतर ढंग से समझ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस विधेयक को मौजूदा स्वरूप में पारित किया गया, तो यह भविष्य में राज्यों के अन्य अधिकारों पर अतिक्रमण का मार्ग प्रशस्त करेगा। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में शैक्षिक मानकों और डिग्रियों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को लेकर चिंतित रहते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में अत्यधिक केंद्रीयकरण से नवाचार और क्षेत्रीय विशेषज्ञता प्रभावित हो सकती है। यदि भारतीय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम होती है, तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव उन छात्रों पर पड़ सकता है जो भविष्य में ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करना चाहते हैं। फिलहाल, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संसद के आगामी सत्र में इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में केंद्र-राज्य संबंधों के बीच एक नया मोर्चा खोल सकता है।
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