राजनीति
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले 'कॉकरोच जनता पार्टी' की गाइडलाइन: सनस्क्रीन और नाश्ते को लेकर जारी किए निर्देश
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 02:30 am

अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को होने वाले अपने पहले विरोध प्रदर्शन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून को होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने अपने समर्थकों के लिए एक अनूठी और विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाला यह समूह देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार, विशेष रूप से NEET और CBSE जैसी परीक्षाओं से जुड़ी हालिया अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एकजुट हो रहा है।
पार्टी द्वारा जारी किए गए 'क्या करें और क्या न करें' (Dos and Don'ts) की सूची में केवल राजनीतिक मांगें ही नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा गया है। निर्देशों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के सूती कपड़े पहनने और सनस्क्रीन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, कार्यकर्ताओं से अपील की गई है कि वे खाली पेट न आएं और सुबह का नाश्ता करके ही विरोध स्थल पर पहुंचें।
कॉकरोच जनता पार्टी का गठन सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक आंदोलन के रूप में हुआ था, जो अब ज़मीनी स्तर पर शिक्षा सुधारों की मांग कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई प्रवासी भारतीय परिवार अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं पर करीब से नज़र रखते हैं। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी न केवल भारत में रहने वाले छात्रों को प्रभावित करती है, बल्कि उन एनआरआई परिवारों की चिंताओं को भी बढ़ाती है जिनके बच्चे भारत में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं।
प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि वे एक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित विरोध प्रदर्शन सुनिश्चित करना चाहते हैं। दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए। पार्टी का मानना है कि अनुशासन के साथ की गई मांग का प्रभाव अधिक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे युवा केंद्रित समूहों का उदय भारतीय राजनीति में एक नए चलन को दर्शाता है, जहाँ सोशल मीडिया की सक्रियता अब वास्तविक दुनिया के आंदोलनों में बदल रही है। 6 जून का यह प्रदर्शन न केवल शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाएगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि यह नया संगठन भविष्य में कितनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
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