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चीन बना रहा है दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक रसद जहाज? हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन बिगड़ने की आशंका

ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 11:33 pm
चीन बना रहा है दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक रसद जहाज? हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन बिगड़ने की आशंका

चीन एक विशाल नौसैनिक रसद जहाज का निर्माण कर रहा है जो अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े जहाजों को भी मात दे सकता है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ने की संभावना है।

चीन अपनी नौसैनिक शक्ति का विस्तार करने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठा रहा है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि बीजिंग एक विशाल नौसैनिक रसद आपूर्ति (replenishment) जहाज का निर्माण कर रहा है, जो आकार में अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े सहायक जहाजों को भी पीछे छोड़ सकता है। यह विकास न केवल चीन की 'ब्लू-वाटर नेवी' बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां भी पेश करता है। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण की गई सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, यह नया जहाज चीन के मौजूदा 'टाइप 901' (Type 901) श्रेणी के जहाजों से काफी बड़ा है। वर्तमान में, टाइप 901 चीनी विमान वाहक समूहों (carrier strike groups) को ईंधन, गोला-बारूद और भोजन की आपूर्ति करने का मुख्य आधार है। नया जहाज संभवतः 50,000 टन से अधिक का विस्थापन (displacement) रखने की क्षमता रखता है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक लॉजिस्टिक्स जहाजों में से एक बना देगा। किसी भी देश की नौसेना के लिए तट से दूर संचालन करने हेतु रसद जहाज रीढ़ की हड्डी की तरह होते हैं। चीन का यह नया जहाज उसे अपने विमान वाहकों को मुख्य भूमि से हजारों मील दूर लंबे समय तक तैनात रखने की क्षमता प्रदान करेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि चीनी नौसेना अब हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के सुदूर इलाकों में अधिक प्रभावी ढंग से और लंबे समय तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती है। भारतीय नौसेना के लिए, जो हिंद महासागर में अपनी प्रधानता बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक हलकों में भी इस विकास को गंभीरता से देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों और 'क्वाड' (QUAD) जैसे संगठनों की सक्रियता के बीच, चीन की बढ़ती समुद्री ताकत क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के जहाजों का निर्माण बीजिंग की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह दक्षिण चीन सागर से बाहर अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करना चाहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक जहाज की बात नहीं है, बल्कि चीन के उस बढ़ते बुनियादी ढांचे का हिस्सा है जिसमें जिबूती जैसे विदेशी बंदरगाह और अब ये विशाल आपूर्ति जहाज शामिल हैं। हालांकि अमेरिकी नौसेना के पास वर्तमान में दुनिया का सबसे शक्तिशाली लॉजिस्टिक्स नेटवर्क है, लेकिन चीन जिस गति से अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, वह वैश्विक सैन्य संतुलन को बदलने का संकेत दे रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए, यह विकास उनकी अपनी समुद्री निगरानी और रक्षा सहयोग को और तेज करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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