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कावेरी जल विवाद: AIADMK प्रमुख पलानीस्वामी ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की

ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 08:36 pm
कावेरी जल विवाद: AIADMK प्रमुख पलानीस्वामी ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की

एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कावेरी जल विवाद पर राज्य सरकार की विफलता पर चिंता जताई है और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

तमिलनाडु में विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने कावेरी जल विवाद को लेकर राज्य की मौजूदा डीएमके (DMK) सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से इस संवेदनशील मुद्दे पर आम सहमति बनाने और केंद्र व कर्नाटक सरकार पर दबाव बनाने के लिए तत्काल एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ढुलमुल नीति के कारण राज्य के किसानों के हितों के साथ समझौता किया जा रहा है। चेन्नई में मीडिया को संबोधित करते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि कावेरी नदी तमिलनाडु की जीवन रेखा है, विशेष रूप से डेल्टा क्षेत्र के लिए, जहां लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए इसी पानी पर निर्भर हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु (Mekedatu) बांध परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि यह परियोजना पूरी हो जाती है, तो तमिलनाडु का डेल्टा क्षेत्र रेगिस्तान में बदल जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर कानूनी और कूटनीतिक रूप से विफल रही है। राजनीतिक हलकों में यह मांग ऐसे समय में आई है जब तमिलनाडु के कई हिस्सों में पानी की कमी और खेती की चिंताएं बढ़ रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-तमिल समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा इसी डेल्टा क्षेत्र से आता है। वहां रह रहे प्रवासी अपने परिवारों की कृषि भूमि और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंतित हैं। कावेरी का जल स्तर सीधे तौर पर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, जिसका असर प्रवासी भारतीयों द्वारा घर भेजे जाने वाले धन और वहां की जमीन जायदाद पर भी पड़ता है। जल विवाद के अलावा, पलानीस्वामी ने डीएमके के चुनावी वादों पर भी निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सहकारी बैंकों में किसानों के बकाया कृषि ऋणों को माफ करने के अपने वादे को जल्द पूरा नहीं किया, तो एआईएडीएमके पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही कावेरी संकट के कारण कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और सरकार की निष्क्रियता उनकी परेशानियों को बढ़ा रही है। अंत में, एआईएडीएमके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है। उन्होंने मुख्यमंत्री स्टालिन से आग्रह किया कि वे केवल कानूनी लड़ाई पर निर्भर न रहें, बल्कि सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर केंद्र सरकार पर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों को लागू करने के लिए दबाव डालें।
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