राजनीति
99% आबादी की समस्याओं का समाधान 1% 'सुपर-रिच' के पास: ज्यां द्रेज का आर्थिक विषमता पर विश्लेषण
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 12:31 pm
वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब की नई रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अति-संपन्न लोगों पर मामूली टैक्स लगाकर जलवायु परिवर्तन और गरीबी जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।
पेरिस स्थित वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब (World Inequality Lab) द्वारा हाल ही में जारी 'ग्लोबल जस्टिस रिपोर्ट' ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय की बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने इस रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा करते हुए बताया है कि किस तरह दुनिया की मात्र 1% अति-संपन्न आबादी के पास उन संकटों को हल करने की कुंजी है, जिनसे शेष 99% मानवता जूझ रही है। थॉमस पिकेटी के नेतृत्व में तैयार की गई यह रिपोर्ट मुख्य रूप से दो बड़े संकटों—आर्थिक विषमता और जलवायु परिवर्तन—पर केंद्रित है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की संपत्ति में पिछले कुछ दशकों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जबकि वैश्विक आबादी का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष कर रहा है। ज्यां द्रेज का तर्क है कि यदि इन 'सुपर-रिच' लोगों की संपत्ति पर एक छोटा सा प्रगतिशील टैक्स (Progressive Tax) लगाया जाए, तो इससे प्राप्त होने वाली राशि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और गरीबी उन्मूलन के लिए पर्याप्त होगी। भारत जैसे देशों के लिए, जहाँ आय की असमानता चरम पर है, यह रिपोर्ट विशेष महत्व रखती है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह मुद्दा प्रासंगिक है। एक विकसित राष्ट्र के रूप में ऑस्ट्रेलिया की नीतियां और वहां रहने वाले प्रवासियों का आर्थिक योगदान वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव गरीब देशों पर पड़ता है, जबकि इसके लिए जिम्मेदार कार्बन उत्सर्जन में अमीरों की जीवनशैली का बड़ा हाथ होता है। इस 'कार्बन असमानता' को दूर करने के लिए वैश्विक स्तर पर धन के पुनर्वितरण की आवश्यकता है।
ज्यां द्रेज ने स्पष्ट किया है कि यह केवल दान का मामला नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित नीतिगत बदलाव की मांग है। रिपोर्ट में प्रस्तावित 'वैश्विक संपत्ति कर' का उद्देश्य किसी की निजी संपत्ति को छीनना नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना है जहाँ विकास का लाभ सभी तक पहुँच सके। यदि दुनिया के शीर्ष 1% लोग अपनी आय का एक छोटा हिस्सा वैश्विक भलाई के लिए साझा करते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं।
निष्कर्षतः, 'ग्लोबल जस्टिस रिपोर्ट' यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी समस्या नहीं है, बल्कि उनका असमान वितरण असली चुनौती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को इस दिशा में मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना इस विषमता को कम करना संभव नहीं होगा।
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