राजनीति
फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से राहत, CID दफ्तर में हुई पूछताछ
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 10:00 pm
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को फर्जी हस्ताक्षर मामले में तीन सप्ताह की राहत दी है, हालांकि उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी कानूनी उठापटक के बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत दी है। गुरुवार को अदालत ने एक कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि बनर्जी के खिलाफ अगले तीन सप्ताह तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि सांसद को जांच में पूरी तरह से सहयोग करना होगा।
अदालत के इस सुरक्षात्मक आदेश के तुरंत बाद, अभिषेक बनर्जी शाम करीब 5:50 बजे कोलकाता स्थित सीआईडी (CID) मुख्यालय, भवानी भवन पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले के विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी अनिवार्य किया है कि यदि भविष्य में सीआईडी उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाना चाहती है, तो उन्हें कम से कम 24 घंटे पहले औपचारिक नोटिस देना होगा।
यह मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति और उससे जुड़े कानूनी दस्तावेजों पर कथित गलत हस्ताक्षरों से संबंधित है। एक तरफ जहां कानूनी मोर्चे पर यह बहस चल रही है, वहीं दूसरी ओर विधानसभा के भीतर भी राजनीतिक घमासान तेज है। बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। टीएमसी का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष का चयन केवल राजनीतिक दल द्वारा किया जाना चाहिए, न कि केवल विधायक दल द्वारा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भारत की क्षेत्रीय राजनीति और वहां की न्यायिक प्रक्रियाएं हमेशा से रुचि का विषय रही हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से जुड़े प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभिषेक बनर्जी को राज्य की राजनीति में ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच चल रहे इन कानूनी विवादों का असर अक्सर प्रवासी भारतीयों के बीच होने वाली राजनीतिक चर्चाओं में भी दिखाई देता है।
फिलहाल, हाईकोर्ट के इस आदेश ने अभिषेक बनर्जी को तात्कालिक राहत प्रदान की है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तीन सप्ताह की इस अवधि के दौरान सीआईडी अपनी जांच को किस दिशा में ले जाती है और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर चल रहा विवाद क्या नया मोड़ लेता है।
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