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बड़ी खबर: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता तय, 19 जून को होंगे हस्ताक्षर; हॉर्मुज जलडमरूमध्य तत्काल खुला
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 11:01 am

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक घेराबंदी हटा ली गई है।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों से चले आ रहे तनाव के बाद एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के साथ एक नया समझौता अंतिम रूप ले चुका है। इस ऐतिहासिक समझौते पर औपचारिक रूप से 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस घोषणा ने वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर की पुष्टि करते हुए लिखा, "ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है।" उन्होंने इस उपलब्धि को वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। समझौते के तत्काल प्रभाव के रूप में, ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल खोलने का निर्देश दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है और पिछले कुछ समय से अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी के कारण यहां आवाजाही बाधित थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संयुक्त राज्य नौसेना की घेराबंदी को तत्काल हटाने के आदेश दे दिए हैं। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, "मैं हॉर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-मुक्त खोलने के लिए पूर्णतः अधिकृत करता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी को तत्काल हटाने का निर्देश देता हूं। सभी को बधाई!"
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और अंततः ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों द्वारा अपने घरों को भेजे जाने वाले धन (remittances) की क्रय शक्ति पर पड़ सकता है। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से भी इस स्थिरता को सकारात्मक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का विवरण अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है, लेकिन हॉर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग का खुलना वैश्विक व्यापार के लिए बड़ी राहत है। ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों के लिए, जो समुद्री सुरक्षा और मुक्त व्यापार मार्ग के हिमायती रहे हैं, यह विकास कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। 19 जून को होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, जहां इस समझौते की शर्तों और भविष्य की रूपरेखा का खुलासा होगा।
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