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भोपाल का DPI दफ्तर बना आंदोलनों का केंद्र: शिक्षकों और अभ्यर्थियों की मांगों पर बरकरार गतिरोध

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 12:31 pm
भोपाल का DPI दफ्तर बना आंदोलनों का केंद्र: शिक्षकों और अभ्यर्थियों की मांगों पर बरकरार गतिरोध

भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के बाहर रोजाना शिक्षकों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों का जमावड़ा लगा रहता है, जहां विभिन्न संगठन अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गौतम नगर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का कार्यालय इन दिनों प्रशासनिक गतिविधियों से अधिक विरोध प्रदर्शनों के लिए चर्चा में है। यह कार्यालय प्रदेश के हजारों शिक्षकों, अतिथि शिक्षकों और भर्ती के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का मुख्य केंद्र बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि यहां कोई एक संयुक्त आंदोलन होने के बजाय, अलग-अलग गुट अपनी विशिष्ट मांगों को लेकर बारी-बारी से प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे विभाग पर दबाव लगातार बना हुआ है। हाल के हफ्तों में, शिक्षक संगठनों और बेरोजगार युवाओं की आवाजाही इतनी बढ़ गई है कि पुलिस प्रशासन को यहां अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी समूहों में शिक्षक कांग्रेस, राज्य शिक्षक संघ, अतिथि शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, अध्यापक संघ और टीईटी (TET) संघर्ष समिति जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक संगठन की अपनी प्राथमिकताएं हैं। जहां अतिथि शिक्षक नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और रिक्त पदों को भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलनों की इस बढ़ती आवृत्ति का मुख्य कारण प्रशासनिक स्तर पर मांगों का समाधान न होना बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस नीतिगत बदलाव नहीं दिख रहा है। उदाहरण के तौर पर, अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन जब स्थायी भर्ती की बात आती है, तो उनके अनुभव को उचित महत्व नहीं दिया जाता। इसी तरह, प्राथमिक शिक्षक संघ वेतन विसंगतियों और पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे मुद्दों पर अडिग है। प्रशासनिक गलियारों में इस 'टुकड़ों में होने वाले विरोध' को एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे सभी समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन वित्तीय बोझ और कानूनी अड़चनों के कारण कुछ मांगों को तुरंत पूरा करना संभव नहीं है। संगठनों के बीच एकता की कमी भी सरकार के लिए स्थिति को टालने का एक साधन बन जाती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर वे लोग जो मध्य प्रदेश से संबंध रखते हैं, यह खबर महत्वपूर्ण है। प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा भारत में शिक्षा और सरकारी क्षेत्र में सुधारों पर गहरी नजर रखता है। ऑस्ट्रेलिया की सुव्यवस्थित शिक्षा प्रणाली और शिक्षक अधिकारों की तुलना में, मध्य प्रदेश के शिक्षकों का यह निरंतर संघर्ष भारतीय प्रशासनिक ढांचे की जटिलताओं को दर्शाता है। कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जिनके परिवार के सदस्य भारत में शिक्षण पेशे से जुड़े हैं, इन घटनाक्रमों को लेकर चिंतित रहते हैं। यह विरोध केवल एक कार्यालय के बाहर का शोर नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गहरे असंतोष का प्रतीक है।
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