राजनीति
हाई कोर्ट के फैसले के दो माह बाद बदली भोजशाला की तस्वीर, विकास कार्यों और धार्मिक गतिविधियों को मिली रफ्तार
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 03:31 am

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई के फैसले के बाद धार की भोजशाला में विकास कार्यों और धार्मिक गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे परिसर का स्वरूप बदल गया है।
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में पिछले दो महीनों के दौरान व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा 15 मई को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद, इस विवादित स्थल पर न केवल विकास कार्यों ने गति पकड़ी है, बल्कि धार्मिक और पर्यटकों की गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह स्थल, जिसे हिंदू पक्ष वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है और मुस्लिम पक्ष कमाल मौला की मस्जिद, लंबे समय से कानूनी और सामाजिक चर्चा का केंद्र रहा है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पिछले 60 दिनों में, भोजशाला के भीतर साफ-सफाई, संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों में सुधार किया गया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के कारण अब प्रबंधन में पारदर्शिता आई है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।
धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से देखा जाए तो, कोर्ट के फैसले ने पूजा और इबादत के समय और प्रोटोकॉल को लेकर चल रहे भ्रम को काफी हद तक कम किया है। मंगलवार को होने वाली पूजा और शुक्रवार की नमाज के दौरान अब प्रशासन अधिक व्यवस्थित रूप से भीड़ का प्रबंधन कर रहा है। इसके साथ ही, भोजशाला के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने के लिए सूचना बोर्डों और गाइड सेवाओं को भी उन्नत किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत के इन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण हमेशा से रुचि का विषय रहा है। भोजशाला जैसे स्थलों पर न्यायिक स्पष्टता न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने में मदद करती है, बल्कि यह विदेशों में रह रहे प्रवासियों को भी अपनी जड़ों से जुड़ने का एक सकारात्मक संदेश देती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत में धार्मिक स्थलों के विकास को देश की बढ़ती सांस्कृतिक संप्रभुता के रूप में देखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एएसआई की विस्तृत रिपोर्ट इस परिसर के भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। वर्तमान में, जिस तरह से विकास कार्यों को गति दी जा रही है, उससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस स्थल को एक प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप ने न केवल कानूनी विवाद को एक प्रक्रियात्मक दिशा दी है, बल्कि धार के स्थानीय विकास को भी एक नई संजीवनी प्रदान की है।
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