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बीजिंग से युवाओं का मोहभंग: एक दशक में 20-29 आयु वर्ग की आबादी हुई आधी, बदल रहे हैं वैश्विक रुझान
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 10:00 am
बीजिंग में 20 से 29 वर्ष के युवाओं की संख्या पिछले दस वर्षों में लगभग आधी रह गई है, जो चीन के बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य का संकेत है।
चीन की राजधानी बीजिंग, जो कभी देश के हर युवा के सपनों का केंद्र हुआ करती थी, अब एक जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रही है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में बीजिंग में 20 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है। यह बदलाव न केवल चीन की आंतरिक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह उन वैश्विक प्रवृत्तियों को भी दर्शाता है जो ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे प्रवासी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बीजिंग में युवाओं की घटती संख्या के पीछे मुख्य कारण जीवन यापन की अत्यधिक लागत, काम का दबाव और बेहतर जीवन स्तर की तलाश है। '996' वर्क कल्चर (सुबह 9 से रात 9 बजे तक, सप्ताह में 6 दिन काम) ने युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से थका दिया है। इसके परिणामस्वरूप, अब चीनी युवा 'लाइंग फ्लैट' (Tang Ping) जैसे आंदोलनों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका अर्थ है प्रतिस्पर्धा से पीछे हटकर न्यूनतम जरूरतों के साथ जीवन जीना।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग में रियल एस्टेट की आसमान छूती कीमतें और बच्चों के पालन-पोषण का खर्च भी युवाओं को बड़े शहरों से दूर कर रहा है। कई युवा अब छोटे शहरों की ओर रुख कर रहे हैं या विदेशों में अवसरों की तलाश कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह स्थिति विशेष रूप से प्रासंगिक है। सिडनी और मेलबर्न जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में भी भारतीय छात्र और युवा पेशेवर समान चुनौतियों का सामना करते हैं, जैसे कि किराए में वृद्धि और वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी।
बीजिंग का यह रुझान वैश्विक स्तर पर 'प्रतिभा पलायन' (Talent Migration) के नए पैटर्न को जन्म दे रहा है। जब किसी देश की राजधानी अपनी चमक खोने लगती है, तो उसका सीधा असर वैश्विक श्रम बाजार पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया के परिप्रेक्ष्य में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजिंग जैसे शहरों से होने वाला यह पलायन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कौशल की आपूर्ति को प्रभावित करेगा।
अंततः, बीजिंग की बदलती जनसांख्यिकी इस बात का प्रमाण है कि केवल आर्थिक विकास ही किसी शहर को जीवंत रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। युवाओं को सामाजिक सुरक्षा, मानसिक शांति और वहन करने योग्य जीवन की आवश्यकता होती है। यदि बड़े शहर इन जरूरतों को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो वे अपनी सबसे मूल्यवान संपत्ति—अपनी युवा पीढ़ी—को खो सकते हैं।
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