राजनीति
बठिंडा: सिट के समक्ष बयान दर्ज कराने पर विवाद, शिरोमणि अकाली दल और SGPC में गहराए मतभेद
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 05:31 pm

बठिंडा में एसआईटी के सामने पूर्व जत्थेदार की पेशी को लेकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) पुनर-सुरजीत के नेताओं ने विरोध जताया है, जिससे सिख राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
बठिंडा में चल रही राजनीतिक हलचलों के बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के भीतर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। विवाद की मुख्य जड़ विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पूर्व जत्थेदार की पेशी और बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया है। शिरोमणि अकाली दल (पुनर-सुरजीत) की वरिष्ठ नेता ने अब इस कदम का कड़ा विरोध किया है, जिससे पार्टी के भीतर रणनीतिक मतभेद उजागर हो गए हैं।
यह विवाद तब गहराया जब पूर्व जत्थेदार को बेअदबी और उससे जुड़े मामलों की जांच कर रही एसआईटी के सामने बुलाया गया। SAD (पुनर-सुरजीत) की नेता ने तर्क दिया है कि धार्मिक पदों पर आसीन रहे व्यक्तियों को इस तरह की जांच प्रक्रिया में शामिल करना संस्था की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने पार्टी के ही अन्य गुटों और अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की पेशी से सिख संस्थानों की स्वायत्तता पर आंच आती है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक मामलों का प्रभाव ऑस्ट्रेलिया में बसे विशाल भारतीय समुदाय पर भी पड़ता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में स्थित गुरुद्वारों और सिख संगठनों में अक्सर इन विषयों पर चर्चा होती है। समुदाय के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक संस्थाओं के भीतर कलह का सीधा असर प्रवासी सिखों की धार्मिक भावनाओं और पंजाब के विकास पर पड़ता है।
एसजीपीसी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर दो फाड़ देखने को मिल रहे हैं। एक वर्ग का मानना है कि कानून की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है ताकि दोषियों को सजा मिल सके, जबकि दूसरा वर्ग इसे सिख पंथ के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश के रूप में देख रहा है। नेताओं का आरोप है कि वर्तमान जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं और पुराने मामलों को पुनर्जीवित कर अकाली दल की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, बठिंडा की यह घटना पंजाब की राजनीति में एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष इस आंतरिक विद्रोह को कैसे शांत करते हैं और एसआईटी की जांच आगे क्या रुख लेती है।
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