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जेडी वेंस के बचाव में उतरी कैंपेन टीम से हुई बड़ी चूक, मिलवॉकी में समर्थन के बजाय कर बैठी अपमान

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 07:31 am
जेडी वेंस के बचाव में उतरी कैंपेन टीम से हुई बड़ी चूक, मिलवॉकी में समर्थन के बजाय कर बैठी अपमान

अमेरिका में रिपब्लिकन उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस के समर्थन में किया गया एक पोस्ट उन्हीं के खिलाफ चला गया, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

अमेरिका के आगामी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं बल्कि उनकी अपनी ही डिजिटल टीम की एक गलती है। मिलवॉकी में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान वेंस के भाषण के बाद, उनके बचाव में उतरी 'रैपिड रिस्पांस 47' (Rapid Response 47) नामक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने एक ऐसी वीडियो क्लिप साझा कर दी, जिसने उन्हें समर्थन देने के बजाय और अधिक आलोचना का पात्र बना दिया। यह घटना तब हुई जब वेंस मिलवॉकी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। विपक्षी खेमे और सोशल मीडिया यूजर्स ने वेंस के कुछ हाव-भाव और उनके बोलने के अंदाज को 'अजीब' (weird) करार दिया था। इसके जवाब में, रिपब्लिकन कैंपेन से जुड़े 'रैपिड रिस्पांस 47' खाते ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने एक क्लिप पोस्ट की जिसमें वेंस एक रिपोर्टर के सवाल का जवाब दे रहे थे, लेकिन वह क्लिप उनके आत्मविश्वास को दिखाने के बजाय उनके संवाद की खामियों को उजागर कर गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पोस्ट ने अनजाने में वेंस की उसी छवि को पुख्ता कर दिया जिसे मिटाने की कोशिश की जा रही थी। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए अमेरिकी राजनीति का यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। जेडी वेंस की पत्नी, ऊषा वेंस, भारतीय मूल की हैं, जिसके कारण प्रवासी भारतीयों की दिलचस्पी इस चुनाव में काफी बढ़ गई है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अक्सर इस बात पर चर्चा करते हैं कि अमेरिकी प्रशासन में होने वाले बदलावों का प्रभाव क्वाड (QUAD) देशों और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर क्या पड़ेगा। वेंस जैसे प्रमुख राजनेता की सार्वजनिक छवि में आने वाली ऐसी गिरावट सोशल मीडिया के दौर में बहुत जल्दी वैश्विक स्तर पर फैल जाती है। सोशल मीडिया पर इस चूक को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आलोचकों का कहना है कि वेंस को जनता के बीच एक भरोसेमंद नेता के रूप में पेश करने में उनकी टीम बार-बार विफल हो रही है। दूसरी ओर, उनके समर्थकों का तर्क है कि यह केवल एक मामूली तकनीकी गलती है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। हालांकि, चुनावी रणनीति के नजरिए से देखा जाए तो 'रैपिड रिस्पांस' टीमों का काम त्वरित और सटीक खंडन करना होता है, लेकिन यहाँ उन्होंने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। अमेरिकी चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, डिजिटल स्पेस में होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि मतदाताओं के मन को प्रभावित कर रही है। जेडी वेंस के लिए यह चुनौती और भी बड़ी है क्योंकि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। मिलवॉकी की यह घटना यह सिखाती है कि राजनीति में 'सेल्फ-गोल' कभी-कभी प्रतिद्वंद्वी के हमलों से भी ज्यादा घातक साबित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वेंस की पीआर टीम इस डैमेज कंट्रोल को कैसे संभालती है और इसका असर उनके चुनाव अभियान पर क्या पड़ता है।
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