लाइव
राजनीति
राजनीति

अयोध्या राम मंदिर: क्यों श्याम वर्ण के हैं रामलला? जानिए 'कृष्ण शिला' का महत्व और वैज्ञानिक कारण

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 03:31 pm
अयोध्या राम मंदिर: क्यों श्याम वर्ण के हैं रामलला? जानिए 'कृष्ण शिला' का महत्व और वैज्ञानिक कारण

अयोध्या में रामलला की मूर्ति के श्याम रंग और इसके निर्माण में प्रयुक्त 'कृष्ण शिला' के पीछे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही पूरी दुनिया में उत्सव का माहौल है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण रहा है। सिडनी से लेकर मेलबर्न तक, मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं। हालांकि, कई श्रद्धालुओं के मन में यह जिज्ञासा है कि भगवान श्री राम की नई प्रतिमा 'श्याम वर्ण' यानी गहरे रंग की ही क्यों है? इसका उत्तर हिंदू धर्मग्रंथों और मूर्तिकला के विज्ञान, दोनों में समाहित है। रामलला की इस मनमोहक मूर्ति को मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने तराशा है। इस मूर्ति के निर्माण के लिए 'कृष्ण शिला' (Black Schist) का उपयोग किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम को 'श्यामल' वर्ण का बताया गया है। वाल्मीकि रामायण में उनके स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्हें 'नीलकमल' के समान आभा वाला और श्याम वर्ण का बताया गया है। इसीलिए, उनकी दिव्यता को मूल स्वरूप में दर्शाने के लिए गहरे रंग के पत्थर का चयन किया गया है। वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो 'कृष्ण शिला' अत्यंत विशिष्ट और टिकाऊ होती है। हिंदू धर्म में मूर्तियों का 'अभिषेक' किया जाता है, जिसमें दूध, दही, शहद, घी और जल का उपयोग होता है। सामान्य पत्थर समय के साथ इन पदार्थों के संपर्क में आकर क्षरण (corrosion) का शिकार हो सकते हैं, लेकिन कृष्ण शिला की विशेषता यह है कि यह हजारों वर्षों तक अपरिवर्तित रहती है। इस पत्थर पर न तो एसिड का असर होता है और न ही मौसम के बदलाव का। इसके अलावा, कर्नाटक के कारकला से लाई गई यह शिला 'शालिग्राम' के गुणों के समान मानी जाती है। आध्यात्मिक रूप से, भगवान विष्णु के अवतारों को अक्सर श्याम वर्ण में ही दर्शाया जाता है, चाहे वे श्री कृष्ण हों या श्री राम। यह रंग ब्रह्मांड की अनंतता और गहराई का प्रतीक है। अयोध्या में स्थापित यह 51 इंच की प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की प्राचीन मूर्तिकला और भूवैज्ञानिक संपदा का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय के लिए, यह मूर्ति उनकी सांस्कृतिक पहचान और जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिला के चयन से यह सुनिश्चित हुआ है कि आने वाली कई पीढ़ियां रामलला के इसी भव्य स्वरूप के दर्शन कर सकेंगी, क्योंकि इसकी चमक और मजबूती सदियों तक फीकी नहीं पड़ेगी।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

खमेनेई की अंतिम विदाई: तेहरान में भावुक हुए मोहम्मद बागेर गालिबाफ और अब्बास अराघची
राजनीति

खमेनेई की अंतिम विदाई: तेहरान में भावुक हुए मोहम्मद बागेर गालिबाफ और अब्बास अराघची

तेहरान में आयोजित सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के विदाई समारोह के दौरान ईरान के संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री अपने आंसू नहीं रोक पाए।

4 जुल॰ 2026, 06:31 pm
अयातुल्ला अली खामेनेई: तीन दशकों का नेतृत्व और अमेरिका के साथ निरंतर संघर्ष का इतिहास
राजनीति

अयातुल्ला अली खामेनेई: तीन दशकों का नेतृत्व और अमेरिका के साथ निरंतर संघर्ष का इतिहास

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने तीन दशकों से अधिक समय तक देश का नेतृत्व करते हुए इसे एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

4 जुल॰ 2026, 05:31 pm
सरकारी शिक्षिका की छुट्टी में देरी पर उपजा विवाद: ब्रिटेन में बसी डॉक्टर बेटी ने प्रशासनिक उदासीनता पर उठाए सवाल
राजनीति

सरकारी शिक्षिका की छुट्टी में देरी पर उपजा विवाद: ब्रिटेन में बसी डॉक्टर बेटी ने प्रशासनिक उदासीनता पर उठाए सवाल

ब्रिटेन में रहने वाली एक कश्मीरी डॉक्टर के सोशल मीडिया पोस्ट ने जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विभाग में फैली लालफीताशाही को उजागर किया है, जहां उनकी मां की छुट्टी महीनों से लंबित थी।

4 जुल॰ 2026, 04:31 pm
Original text
Rate this translation
Your feedback will be used to help improve Google Translate