ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया भारत को लौटाएगा तीन प्राचीन मूर्तियां; बदले में भारत देगा प्रथम राष्ट्रों के अवशेष
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 03:31 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान तीन प्राचीन दक्षिण भारतीय मूर्तियों की वापसी की घोषणा की गई, जबकि भारत एक आदिवासी पूर्वज के अवशेष लौटाएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपलब्धि दर्ज की गई है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने दक्षिण भारत के मंदिरों से चोरी की गई तीन बहुमूल्य प्राचीन कलाकृतियों को भारत को वापस करने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण कदम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान की गई, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती आपसी समझ और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
वापस की जाने वाली इन कलाकृतियों में मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय मंदिरों की प्राचीन मूर्तियां शामिल हैं, जिन्हें दशकों पहले अवैध रूप से देश से बाहर ले जाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, ये कलाकृतियां न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और शिल्प कला का प्रतीक भी हैं। इन बेशकीमती धरोहरों की वापसी भारत सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत दुनिया भर के संग्रहालयों और निजी संग्रहों से चोरी की गई भारतीय कलाकृतियों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
एक सराहनीय कूटनीतिक और मानवीय पहल के रूप में, भारत ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है। जवाब में, एक भारतीय संग्रहालय अपने पास रखे 'फर्स्ट नेशंस' (ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासी) पूर्वज के अवशेषों को ऑस्ट्रेलिया को वापस सौंपेगा। यह पहली बार है जब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस तरह का 'पारस्परिक प्रत्यावर्तन' (reciprocal repatriation) हो रहा है। यह कदम ऑस्ट्रेलिया के स्वदेशी समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने और उनके इतिहास को स्वीकार करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय ने इस निर्णय का तहे दिल से स्वागत किया है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीयों का मानना है कि यह पहल न केवल भारत की खोई हुई विरासत को बहाल करती है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान को भी बढ़ाती है। समुदाय के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने न केवल व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूती दी है, बल्कि 'सॉफ्ट पावर' के माध्यम से भावनात्मक जुड़ाव को भी गहरा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कलाकृतियों और अवशेषों का यह आदान-प्रदान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूनेस्को की संधियों के अनुरूप है, जो सांस्कृतिक संपत्ति के अवैध व्यापार को रोकने पर जोर देते हैं। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम से अन्य पश्चिमी देशों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपने यहां मौजूद चोरी की गई विदेशी कलाकृतियों के मूल देशों को वापसी की प्रक्रिया तेज करें। आने वाले हफ्तों में इन कलाकृतियों को औपचारिक रूप से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया जाएगा, जिसके बाद इन्हें उनके मूल स्थानों या राष्ट्रीय संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जा सकता है।
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