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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक यूरेनियम समझौता: मेलबर्न शिखर सम्मेलन में मोदी-अल्बनीज ने दी मंजूरी
ICN24 Admin 10 जुल॰ 2026, 10:44 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने मेलबर्न में यूरेनियम निर्यात समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती देगा।
मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया — भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आज अपने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ते हुए एक ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत अब ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम का निर्यात सुगम हो जाएगा, जो भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (Civilian Nuclear Energy Program) को नई गति प्रदान करेगा। यह घोषणा मेलबर्न में आयोजित तीसरे 'भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन' के दौरान की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के बीच हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में न केवल ऊर्जा, बल्कि महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals), शिक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और द्विपक्षीय व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास के साझा विजन को दोहराया।
समझौते की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि यह कदम 'भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते' को पूरी तरह सक्रिय करता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत को अपनी स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा और साथ ही ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र (Resources Sector) के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करेगा। अल्बनीज ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया अपने रणनीतिक साझेदारों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा योजनाओं को मजबूती प्रदान करेगी। गौरतलब है कि भारत ने साल 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करने का लक्ष्य रखा है, और देश के विभिन्न हिस्सों में कई नए परमाणु रिएक्टरों का निर्माण कार्य पहले से ही जारी है।
दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक होने के नाते, ऑस्ट्रेलिया भारत की इस बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि, यह समझौता ऑस्ट्रेलिया की घरेलू ऊर्जा नीति में एक दिलचस्प विरोधाभास को भी रेखांकित करता है। एक तरफ जहां ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को शांतिपूर्ण असैन्य उपयोग के लिए यूरेनियम का निर्यात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर घरेलू परमाणु ऊर्जा उत्पादन पर अभी भी कानूनी प्रतिबंध लागू है।
इस शिखर सम्मेलन ने यह भी दर्शाया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी अब केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और तकनीकी नवाचार की दिशा में भी मजबूती से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता आने वाले दशकों में दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को और अधिक गहरा करेगा।
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