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असम कैबिनेट का बड़ा फैसला: युवाओं के लिए अलग विभाग और कोचिंग संस्थानों पर कड़े नियमों को मंजूरी
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 06:37 am

असम सरकार ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए नए विभाग और कड़े कोचिंग नियमों को मंजूरी दी है।
गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट ने युवाओं के कल्याण, छात्रों की सुरक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक फैसलों को मंजूरी दी है। इस महत्वपूर्ण बैठक में एक समर्पित 'युवा अधिकारिता और कल्याण विभाग' के गठन के साथ-साथ निजी कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए कड़े दिशानिर्देशों को हरी झंडी दिखाई गई है।
कैबिनेट के सबसे प्रमुख फैसलों में से एक 'युवा अधिकारिता और कल्याण विभाग' का गठन है। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि यह विभाग विभिन्न युवा-केंद्रित कार्यक्रमों और संस्थानों को एक एकल प्रशासनिक ढांचे के नीचे लाएगा। वर्तमान में, खेल और युवा मामले आमतौर पर एक ही विभाग के अंतर्गत आते हैं, लेकिन असम संभवतः देश का पहला ऐसा राज्य होगा जहां युवाओं के लिए एक विशेष विभाग होगा। यह विभाग एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS), भारत स्काउट्स एंड गाइड्स और रोजगार कार्यालयों जैसे निकायों का समन्वय करेगा। इसका उद्देश्य केवल खेल नहीं, बल्कि युवाओं के नेतृत्व कौशल, उद्यमिता और समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। यह नया विभाग 17 सितंबर से सक्रिय हो जाएगा।
छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए, सरकार ने 'असम निजी कोचिंग संस्थान (नियंत्रण और छात्र मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा) नियम, 2026' को भी मंजूरी दी है। नए नियमों के अनुसार, 50 या उससे अधिक छात्रों वाले किसी भी कोचिंग संस्थान को जिला प्रशासन के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव के कारण छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए संस्थानों को अब मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं (counsellors) की नियुक्ति करनी होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोचिंग संस्थानों को अब न केवल शैक्षणिक परिणाम, बल्कि छात्रों के भावनात्मक स्वास्थ्य की भी जिम्मेदारी लेनी होगी। नियमों में शारीरिक सुरक्षा के मानक भी तय किए गए हैं, जिसमें पंखों की बनावट और खिड़कियों पर सुरक्षा रॉड जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण तकनीकी विवरण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने 'असम राज्य बाल संरक्षण नीति, 2026' और 'असम जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) नियम, 2026' के मसौदे को मंजूरी दी है। ये कदम किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और पोक्सो (POCSO) नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रवासी भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा भारत में शिक्षा प्रणाली और छात्रों के कल्याण से जुड़ी नीतियों पर गहरी नजर रखता है। ऑस्ट्रेलिया में जहां छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है, असम सरकार का यह कदम वैश्विक मानकों के अनुरूप एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। विशेष रूप से उन परिवारों के लिए जिनके बच्चे भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, ये नए सुरक्षा नियम एक बड़ी राहत की तरह देखे जा रहे हैं।
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