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असम समझौता: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा—पूरी बांग्लादेश सीमा की घेराबंदी न करना एक 'ऐतिहासिक भूल' थी
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 05:31 am

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि 1985 के असम समझौते में केवल असम ही नहीं, बल्कि पांचों सीमावर्ती राज्यों में भारत-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सील करने की मांग की जानी चाहिए थी।
गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 1985 के ऐतिहासिक असम समझौते को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के समय केवल असम की सीमा पर बाड़ लगाने की मांग करना एक बड़ी चूक थी। उन्होंने तर्क दिया कि घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा साझा करने वाले सभी पांच राज्यों—असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और पश्चिम बंगाल—की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करने की मांग की जानी चाहिए थी।
भाजपा मुख्यालय में केंद्र सरकार के कार्यकाल के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने केवल असम की सीमा की घेराबंदी कर राज्य के लोगों को गुमराह किया, जबकि अन्य राज्यों के रास्ते घुसपैठ की खिड़की खुली रखी गई। सरमा के अनुसार, इसी वजह से विदेशी नागरिक अन्य राज्यों के रास्ते भारत में प्रवेश कर अंततः असम में बस जाते रहे हैं।
प्रवासी भारतीयों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह विषय भारत की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय चुनौतियों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान केंद्र सरकार अब शेष बचे हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़ लगाने का काम तेजी से पूरा कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि मेघालय और त्रिपुरा में काम शुरू हो चुका है और जल्द ही पश्चिम बंगाल की सीमा पर भी घेराबंदी शुरू की जाएगी।
जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Changes) पर चिंता जताते हुए सरमा ने कहा कि सरकार ने इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असम सरकार का रुख स्पष्ट है—पूरी सीमा को सील किया जाना चाहिए और पहचान की कड़ी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम केवल विदेशियों की बात नहीं कर रहे, बल्कि जनसांख्यिकी की बात कर रहे हैं। आजादी के समय हिंदू, मुस्लिम और ईसाइयों की आबादी क्या थी और अब क्या है, यह चिंता का विषय है।"
सुरक्षा के रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने 22 किलोमीटर लंबे 'चिकन्स नेक' कॉरिडोर (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) की संवेदनशीलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व भारत को शेष देश से जोड़ने वाला यह क्षेत्र सामरिक रूप से काफी कमजोर है। इस खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ब्रह्मपुत्र नदी और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नीचे रेल और सड़क सुरंग परियोजनाओं पर काम कर रही है ताकि किसी भी हमले की स्थिति में उत्तर-पूर्व का संपर्क देश से न टूटे।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके विजन और 'पर्सनल गारंटी' के कारण ही पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन कदमों से न केवल क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
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