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अमरोहा: दहेज हत्या के मामले में पति को 10 साल और सास को 3 साल की कैद
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 09:41 am

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति को 10 वर्ष और सास को 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है, जहां स्थानीय अदालत ने दहेज हत्या के एक संवेदनशील मामले में दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) ने मृतका के पति को दस वर्ष के कठोर कारावास और उसकी सास को तीन वर्ष की कैद की सजा दी है। यह फैसला समाज में दहेज जैसी कुरीति के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
मामले के विवरण के अनुसार, यह घटना कुछ समय पूर्व की है जब पीड़िता की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद से ही उसे अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। लगातार मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर दी गई या उसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया गया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी (दहेज हत्या) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूत और गवाह पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पति को मुख्य दोषी मानते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई, जबकि सास को इस अपराध में संलिप्तता के लिए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी। साथ ही, दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि भारत में दहेज विरोधी कानून (Dowry Prohibition Act) अत्यंत सख्त हैं। अक्सर प्रवासी भारतीयों (NRIs) के मामलों में भी देखा गया है कि वैवाहिक विवादों में दहेज के आरोप गंभीर कानूनी जटिलताएं पैदा करते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले न केवल न्याय सुनिश्चित करते हैं, बल्कि उन परिवारों के लिए भी चेतावनी हैं जो अभी भी दहेज प्रथा को बढ़ावा देते हैं।
अमरोहा की अदालत का यह निर्णय त्वरित न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। उत्तर प्रदेश पुलिस और अभियोजन विभाग ने इस मामले में प्रभावी पैरवी की, जिससे पीड़िता के परिवार को न्याय मिल सका। भारत में महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में इस तरह के दंड को एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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