ऑस्ट्रेलिया
पैरालंपिक में सटीक निशाने की तैयारी: दृष्टिबाधित तीरंदाज ने अपनी बाधाओं को बनाया ताकत
ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 04:31 pm
एक दृष्टिबाधित तीरंदाज पैरालंपिक खेलों में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ा अभ्यास कर रहा है, जो शारीरिक सीमाओं को लांघकर दुनिया के लिए मिसाल बन रहे हैं।
खेलों की दुनिया में अक्सर ऐसी कहानियाँ सामने आती हैं जो मानवीय सीमाओं को चुनौती देती हैं और हमें यह विश्वास दिलाती हैं कि दृढ़ संकल्प से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया के खेल जगत में इन दिनों एक ऐसे ही दृष्टिबाधित तीरंदाज की चर्चा जोरों पर है, जो न केवल अपनी शारीरिक अक्षमता से लड़ रहे हैं, बल्कि पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का सपना भी संजोए हुए हैं। उनकी यह यात्रा तकनीक, धैर्य और अटूट साहस का एक अद्भुत संगम है।
दृष्टिबाधित तीरंदाजी सुनने में थोड़ा विरोधाभासी लग सकता है, लेकिन यह एक अत्यधिक तकनीकी और मानसिक खेल है। तीरंदाज एक विशेष प्रकार के 'टैक्टाइल विजुअल एड' या स्पर्श-आधारित उपकरणों का उपयोग करते हैं। इसमें एक स्टैंड होता है जिसे वे अपने हाथों से छूकर दिशा का अनुमान लगाते हैं। एक बार जब वे अपनी स्थिति और लक्ष्य की सीध को समझ लेते हैं, तो उनकी एकाग्रता ही उनके तीर को सही दिशा देती है। यह खेल केवल देखने के बारे में नहीं है, बल्कि यह शरीर की मुद्रा, सांसों के नियंत्रण और मानसिक स्थिरता के बारे में है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह कहानी विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के कई परिवार खेलों को न केवल मनोरंजन बल्कि जीवन के अनुशासन के रूप में देखते हैं। इस तीरंदाज की सफलता यह संदेश देती है कि समावेशी खेल (Inclusive Sports) समाज के हर वर्ग के लिए उपलब्ध हैं। ऑस्ट्रेलिया में 'पैरा-स्पोर्ट्स' के लिए बुनियादी ढांचा और समर्थन काफी मजबूत है, जिसका लाभ अब नई पीढ़ी के एथलीट उठा रहे हैं। भारतीय समुदाय में भी दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा के खेलों से जोड़ने के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
प्रशिक्षण के दौरान चुनौतियों का जिक्र करते हुए उनके कोच बताते हैं कि एक सामान्य तीरंदाज और एक दृष्टिबाधित तीरंदाज के बीच मुख्य अंतर 'भरोसे' का होता है। खिलाड़ी को अपनी मांसपेशियों की स्मृति (Muscle Memory) और अपने सहयोगियों द्वारा दी गई सूचनाओं पर पूरा भरोसा करना पड़ता है। हर शॉट के बाद, एक सहायक उन्हें बताता है कि तीर निशाने से कितनी दूर लगा है, जिसके आधार पर वे अगले शॉट के लिए सूक्ष्म समायोजन करते हैं।
आगामी पैरालंपिक खेलों की तैयारी करते हुए यह एथलीट न केवल अपने व्यक्तिगत गौरव के लिए लड़ रहे हैं, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं जो किसी न किसी शारीरिक बाधा से जूझ रहे हैं। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि दृष्टि केवल आँखों से नहीं, बल्कि सपनों और हौसलों से भी होती है। जैसे-जैसे पैरालंपिक की तारीखें नजदीक आ रही हैं, पूरा ऑस्ट्रेलिया और भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय इन नायकों का मनोबल बढ़ाने के लिए तैयार है।
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