राजनीति
उत्तरी तमिलनाडु में AIADMK की जीत का श्रेय PMK गठबंधन को: पूर्व मंत्री सी.वी. षणमुगम का अपनी ही पार्टी पर निशाना
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 10:31 am

एआईएडीएमके नेता सी.वी. षणमुगम ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उत्तरी तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी सफलता का मुख्य कारण पीएमके के साथ गठबंधन था।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर आंतरिक कलह उभरकर सामने आई है। एआईएडीएमके (AIADMK) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सी.वी. षणमुगम ने अपनी ही पार्टी के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व पर परोक्ष रूप से सवाल उठाए हैं। तिंडीवनम में पत्रकारों से बात करते हुए, षणमुगम ने दावा किया कि उत्तरी तमिलनाडु के विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी ने जो भी सफलता हासिल की थी, वह मुख्य रूप से पट्टाली मक्कल काची (PMK) के साथ हुए चुनावी गठबंधन का परिणाम थी।
षणमुगम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी हाल के लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है। पूर्व मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उत्तरी बेल्ट में पार्टी का आधार मजबूत करने में पीएमके के वोट बैंक ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। उनके इस बयान को वर्तमान नेतृत्व की रणनीतियों की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि एआईएडीएमके हाल के वर्षों में कई प्रमुख सहयोगियों को खो चुकी है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से तमिल प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय तमिल संगठन अक्सर राज्य की राजनीति पर करीब से नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई तमिल मूल के लोग तमिलनाडु के आर्थिक और राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, और एआईएडीएमके जैसी बड़ी पार्टी में फूट राज्य के राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
षणमुगम ने तर्क दिया कि पार्टी को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है और सहयोगियों के महत्व को नजरअंदाज करना आत्मघाती साबित हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि नेतृत्व को केवल क्षेत्रीय प्रभाव पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक गठबंधन की राजनीति पर ध्यान देना चाहिए। एआईएडीएमके के भीतर इस तरह के खुले विरोध से संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में पलानीस्वामी के लिए पार्टी को एकजुट रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
वर्तमान में पार्टी के भीतर ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) और टी.टी.वी. दिनाकरण जैसे गुटों के अलग होने के बाद से अस्थिरता बनी हुई है। षणमुगम की टिप्पणी ने पार्टी के कैडरों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या पीएमके के साथ गठबंधन तोड़ना एक रणनीतिक भूल थी। तमिलनाडु की राजनीति में जातिगत समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव हमेशा से हावी रहे हैं, और उत्तरी जिलों में वन्नियार समुदाय का समर्थन प्राप्त करने के लिए पीएमके एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती रही है।
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