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मुमताज़ के नाम से ही हाउसफुल हो जाते थे सिनेमाघर: वो 6 फिल्में जिन्होंने उन्हें बनाया बॉलीवुड की 'बॉक्स ऑफिस क्वीन'
ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 07:35 pm

हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की सुपरस्टार मुमताज़ ने स्टंट फिल्मों से निकलकर बॉक्स ऑफिस पर राज किया। देखिए उनकी वो 6 फिल्में जिन्होंने फिल्म जगत की दिशा बदल दी।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी बहुत कम अभिनेत्रियां रही हैं, जिन्होंने अपनी शर्तों पर फिल्म जगत के समीकरणों को बदला। साठ और सत्तर के दशक में मुमताज़ एक ऐसा नाम बनकर उभरीं, जिनके होने मात्र से फिल्म की सफलता सुनिश्चित मानी जाती थी। आज जब हम बॉलीवुड में 'स्टार सिस्टम' की बात करते हैं, तो मुमताज़ का जिक्र अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने न केवल सहायक भूमिकाओं से मुख्य नायिका तक का सफर तय किया, बल्कि उस दौर के दिग्गज अभिनेताओं को भी बॉक्स ऑफिस पर कड़ी टक्कर दी।
मुमताज़ का फिल्मी सफर किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 'बी-ग्रेड' कही जाने वाली स्टंट फिल्मों से की थी, जहां उन्हें दारा सिंह जैसे पहलवानों के साथ कास्ट किया जाता था। उस दौर में फिल्म समीक्षकों का मानना था कि एक स्टंट एक्ट्रेस कभी मुख्यधारा की ए-लिस्ट नायिका नहीं बन सकती, लेकिन मुमताज़ ने अपनी प्रतिभा और आकर्षण से इन सभी धारणाओं को ध्वस्त कर दिया। उनके अभिनय में एक ऐसी सहजता थी, जो दर्शकों को सीधे जोड़ती थी। ऑस्ट्रेलिया में बसे पुराने भारतीय प्रवासियों के बीच आज भी मुमताज़ की फिल्मों की वही लोकप्रियता बरकरार है, जो दशकों पहले भारत में थी।
मुमताज़ के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में 'दो रास्ते' (1969) का नाम सबसे ऊपर आता है। इस फिल्म ने राजेश खन्ना के साथ उनकी ऐसी जोड़ी बनाई, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे सफल जोड़ियों में से एक साबित हुई। इसके बाद आई 'खिलौना' (1970), जिसने मुमताज़ को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिलाया। इस फिल्म में उन्होंने एक वेश्या की भूमिका को जिस संजीदगी के साथ निभाया, उसने आलोचकों का मुंह बंद कर दिया।
दिलीप कुमार के साथ फिल्म 'राम और श्याम' (1967) में मुमताज़ की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि वे अभिनय सम्राट के सामने भी अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं। इसके बाद 'सच्चा झूठा' और 'आप की कसम' जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता के उस शिखर पर पहुँचा दिया जहाँ उनकी फीस उस दौर के कई बड़े अभिनेताओं से भी अधिक थी। शमी कपूर के साथ फिल्म 'ब्रह्मचारी' का गाना 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' आज भी हर शादी और उत्सव की जान होता है, और इसमें मुमताज़ का ऑरेंज साड़ी वाला ड्रेप स्टाइल एक कल्ट फैशन बन गया।
आज के दौर में जब भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर मुड़कर देखता है, तो मुमताज़ की फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि उस दौर के गौरवशाली सिनेमा की प्रतीक भी हैं। सिडनी और मेलबर्न में होने वाले बॉलीवुड रेट्रो नाइट्स में आज भी मुमताज़ के गानों पर थिरकती पीढ़ियां उनकी अमर विरासत की गवाह हैं। वे सही मायनों में एक ऐसी कलाकार थीं, जिन्होंने अपनी मेहनत से नियति को बदल दिया और सिनेमाई इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।
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