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विशाखापत्तनम स्टील प्लांट हादसा: मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हुई, एक और कर्मचारी ने तोड़ा दम
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 08:31 pm

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में हुए भीषण हादसे में मरने वालों की संख्या 10 पहुंच गई है। गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारी जी. सूरीबाबू की इलाज के दौरान मौत हो गई।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (आरिनएल) में 8 जून को हुए भीषण हादसे के बाद शोक की लहर और गहरी हो गई है। अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे एक और कर्मचारी की मौत के साथ ही इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 10 हो गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारी जी. सूरीबाबू ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
विशाखापत्तनम स्टील प्लांट, जिसे विजाग स्टील के नाम से भी जाना जाता है, भारत के प्रमुख इस्पात संयंत्रों में से एक है। 8 जून को हुई इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटना उस समय हुई थी जब संयंत्र के एक हिस्से में अचानक विस्फोट हुआ, जिससे वहां काम कर रहे कर्मचारी और ठेका मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए थे।
प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, विस्फोट के तुरंत बाद घायलों को विशेष बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, मृतकों में से अधिकांश 70 से 90 प्रतिशत तक जल चुके थे, जिसके कारण उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। जी. सूरीबाबू की मृत्यु की पुष्टि अस्पताल के अधिकारियों ने कर दी है, जिससे संयंत्र के श्रमिक संगठनों में भारी आक्रोश है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न में बसे तेलुगु भाषी प्रवासियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। ऑस्ट्रेलिया के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय मूल के इंजीनियरों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में रोकने के लिए भारत के सार्वजनिक उपक्रमों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल और 'जीरो हार्म' नीति को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
संयंत्र प्रबंधन ने हादसे के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी को संभावित कारण माना जा रहा है। पीड़ित परिवारों ने उचित मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी देने की मांग की है। स्थानीय श्रमिक यूनियनों का आरोप है कि संयंत्र में पुराने बुनियादी ढांचे और रखरखाव की कमी के कारण श्रमिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इस्पात मंत्रालय ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जैसे-जैसे मृतकों की संख्या बढ़ रही है, विशाखापत्तनम में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और सुरक्षा मानकों को लेकर विरोध प्रदर्शनों की संभावना भी जताई जा रही है।
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