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H-1B वीजा धोखाधड़ी: भारतीय मूल के सीईओ नीरज शर्मा की अमेरिकी नागरिकता छीनेगा अमेरिका

ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 04:00 pm
H-1B वीजा धोखाधड़ी: भारतीय मूल के सीईओ नीरज शर्मा की अमेरिकी नागरिकता छीनेगा अमेरिका

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अमेरिकी नागरिकता हासिल करने वाले भारतीय मूल के नीरज शर्मा पर कानूनी गाज गिरी है। उन पर एच-1बी वीजा याचिकाओं में फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप है।

अमेरिका के न्याय विभाग (DoJ) ने भारतीय मूल के एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नीरज शर्मा के खिलाफ उनकी अमेरिकी नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी और जालसाजी के जरिए अपनी नागरिकता और एच-1बी (H-1B) वीजा प्राप्त किया था। यह मामला न केवल अमेरिका, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए भी एक चेतावनी की तरह है, जहां वर्क वीजा और नागरिकता नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी विवरण के अनुसार, नीरज शर्मा ने कई 'शेल' कंपनियों (ऐसी कंपनियां जो केवल कागजों पर मौजूद होती हैं) का एक नेटवर्क बनाया था। इन कंपनियों के माध्यम से उन्होंने दर्जनों एच-1बी याचिकाओं के लिए आवेदन किया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि शर्मा ने इन आवेदनों के समर्थन में वैश्विक वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले पत्र संलग्न किए थे। इन पत्रों का उद्देश्य अमेरिकी सरकार को यह विश्वास दिलाना था कि शर्मा की कंपनियों के पास विदेशी श्रमिकों के लिए वैध काम और अनुबंध मौजूद हैं। जांच में पाया गया कि शर्मा ने न केवल वीजा प्रणाली का दुरुपयोग किया, बल्कि अपनी नागरिकता की प्रक्रिया (Naturalization) के दौरान भी अधिकारियों से झूठ बोला। अमेरिकी कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या भौतिक तथ्यों को छिपाकर नागरिकता प्राप्त करता है, तो सरकार उसे 'डीनेचुरलाइजेशन' (Denaturalization) की प्रक्रिया के माध्यम से रद्द कर सकती है। शर्मा ने कथित तौर पर अपनी पिछली आपराधिक संलिप्तता और जालसाजी की गतिविधियों को नागरिकता आवेदनों में छिपाया था। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भी स्किल्ड माइग्रेशन और प्रायोजन (Sponsorship) को लेकर कड़े नियम हैं। अक्सर यह देखा गया है कि वीजा एजेंट या कंपनियां शॉर्टकट का सहारा लेती हैं, लेकिन शर्मा का मामला यह साबित करता है कि वर्षों बाद भी पुरानी धोखाधड़ी सामने आने पर नागरिकता तक छीनी जा सकती है। ऑस्ट्रेलियाई गृह विभाग (Department of Home Affairs) भी वीजा धोखाधड़ी के मामलों में चरित्र और पूर्ववृत्त (Character requirements) की गहन जांच करता है। नीरज शर्मा के मामले ने वर्क वीजा के नैतिक उपयोग पर फिर से बहस छेड़ दी है। न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई जरूरी है। यदि अदालत शर्मा के खिलाफ फैसला सुनाती है, तो वह न केवल अपनी नागरिकता खो देंगे, बल्कि उन्हें अमेरिका से निर्वासन (Deportation) का सामना भी करना पड़ सकता है। यह मामला उन सभी के लिए एक कड़ा सबक है जो माइग्रेशन सिस्टम में खामियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
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