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अमेरिकी टेक फाउंडर का बड़ा बयान: भारी-भरकम वीजा खर्च के चलते भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में नौकरी पाना हुआ मुश्किल
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 01:31 am
अमेरिका में बढ़ती वीजा फीस और जटिल नियमों के बीच एक टेक फाउंडर ने भारतीय छात्रों की चुनौतियों पर चिंता जताई है, जिससे ऑस्ट्रेलिया जैसे विकल्प और आकर्षक हो गए हैं।
अमेरिका में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। एक अमेरिकी टेक फाउंडर ने हाल ही में साझा किया कि डेटा इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभाओं के लिए एच-1बी (H-1B) वीजा प्राप्त करना अब पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और महंगा हो गया है। उनके अनुसार, एक विदेशी कर्मचारी को प्रायोजित करने की कुल लागत, जिसमें कानूनी शुल्क और सरकारी शुल्क शामिल हैं, 100,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है।
सोशल मीडिया पर एक चर्चा के दौरान, इस उद्यमी ने बताया कि जब भारतीय छात्र उनसे पूछते हैं कि वे अमेरिका में डेटा इंजीनियरिंग की नौकरी कैसे पा सकते हैं, तो उनका उत्तर काफी हतोत्साहित करने वाला होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनियां अब उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास पहले से ही कार्य अधिकार हैं, क्योंकि एच-1बी वीजा की लॉटरी प्रणाली और उससे जुड़ी भारी लागत छोटे और मध्यम स्तर के स्टार्टअप्स के लिए वहन करना मुश्किल होता जा रहा है।
यह स्थिति उन हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा झटका है जो हर साल उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख करते हैं। वीजा नियमों की सख्ती और बढ़ते आर्थिक बोझ ने न केवल नियोक्ताओं को बल्कि छात्रों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। तकनीकी क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले भारतीय छात्र अक्सर अमेरिकी बाजार को अपनी पहली पसंद मानते थे, लेकिन अब अनिश्चितता के चलते वे अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो यह घटनाक्रम भारतीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में हाल ही में लागू किए गए 'मोबिलिटी अरेंजमेंट फॉर टैलेंटेड अर्ली-प्रोफेशनल स्कीम' (MATES) जैसे कार्यक्रम भारतीय पेशेवरों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं। जहां अमेरिका में वीजा की राह कठिन होती जा रही है, वहीं ऑस्ट्रेलिया अपनी कार्य वीजा नीतियों को अधिक सुव्यवस्थित और कौशल-आधारित बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका में वीजा की लागत और प्रक्रिया इसी तरह जटिल बनी रही, तो भारतीय प्रतिभाओं का पलायन ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जर्मनी जैसे देशों की ओर बढ़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया का स्थिर वातावरण और भारतीय प्रवासियों के लिए बढ़ते अवसर इसे उन टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं जो अमेरिका की अनिश्चित वीजा व्यवस्था से बचना चाहते हैं। अंततः, यह वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं के वितरण को बदल सकता है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई टेक इकोसिस्टम को अत्यधिक लाभ होने की संभावना है।
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