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अमेरिकी न्यायाधीश ने 'उच्च जोखिम' वाले देशों से प्रवासन रोकने के ट्रंप प्रशासन के फैसले पर लगाई रोक

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 07:30 am
अमेरिकी न्यायाधीश ने 'उच्च जोखिम' वाले देशों से प्रवासन रोकने के ट्रंप प्रशासन के फैसले पर लगाई रोक

अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन के उस नीतिगत फैसले को रद्द कर दिया है, जिसके तहत लगभग 40 देशों से कानूनी प्रवासन और शरण आवेदनों पर रोक लगाने का प्रयास किया गया था।

संयुक्त राज्य अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने निवर्तमान ट्रंप प्रशासन को एक बड़ा झटका देते हुए उन नीतियों पर रोक लगा दी है, जो लगभग 40 'उच्च जोखिम' वाले देशों से कानूनी प्रवासन और शरण आवेदनों को रोकने के लिए बनाई गई थीं। रोड आइलैंड के जिला न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जॉन जे. मैककोनेल जूनियर ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। उन्होंने प्रशासन के उन आदेशों को चुनौती दी जिनके माध्यम से प्रवासन प्रक्रिया में बाधा डाली जा रही थी। न्यायाधीश मैककोनेल, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त किया गया था, ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशासन की ये नीतियां कानून के स्थापित दायरे के बाहर थीं। ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए लगभग 40 देशों की एक सूची तैयार की थी, जिन्हें प्रवासन के दृष्टिकोण से 'उच्च जोखिम' माना गया था। इस नीति के तहत इन देशों के नागरिकों के वीजा और शरण आवेदनों को अनिश्चित काल के लिए लंबित या बाधित किया जा रहा था। यह निर्णय न केवल उन देशों के प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रह रहे भारतीय समुदायों के लिए भी इसके गहरे निहितार्थ हैं। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों के लिए, जिनके परिवार के सदस्य या रिश्तेदार अमेरिका में बसने की योजना बना रहे हैं, यह फैसला राहत की खबर लेकर आया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अक्सर वैश्विक प्रवासन नीतियों पर कड़ी नजर रखता है, क्योंकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही प्रवासियों के लिए प्राथमिक गंतव्य रहे हैं। अमेरिका में प्रवासन के नियमों में किसी भी तरह की सख्ती का असर अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक छात्र और कार्य वीजा श्रेणियों पर भी पड़ता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नीति प्रवासन प्रणाली को और अधिक जटिल बनाने और सुरक्षा जांच के नाम पर आवेदनों को रोकने का एक प्रयास थी। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और प्रवासन वकीलों ने तर्क दिया कि यह नीति भेदभावपूर्ण थी और उन लोगों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही थी जो कानूनी रूप से अमेरिका में प्रवेश करना चाहते थे। न्यायाधीश ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि सरकार मनमाने ढंग से उन प्रक्रियाओं को नहीं रोक सकती जो कांग्रेस द्वारा पारित कानूनों द्वारा निर्धारित की गई हैं। इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि बाइडेन प्रशासन के कार्यभार संभालने से पहले ट्रंप प्रशासन की कई कट्टरपंथी प्रवासन नीतियों को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीयों के लिए, जो अक्सर बहुराष्ट्रीय परिवार संरचनाओं का हिस्सा होते हैं, अमेरिकी प्रवासन नीतियों में स्थिरता और निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है। यह न्यायिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करता है कि प्रवासन प्रक्रिया केवल राजनीतिक प्राथमिकताओं के बजाय कानूनी मानकों के आधार पर संचालित हो।
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