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अमेरिकी न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा 'स्नैप' खाद्य लाभों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की कोशिशों पर लगाई रोक

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 12:30 pm
अमेरिकी न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा 'स्नैप' खाद्य लाभों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की कोशिशों पर लगाई रोक

एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा स्नैप (SNAP) खाद्य सहायता कार्यक्रम पर नई शर्तें थोपने के प्रयासों पर रोक लगा दी है, जिससे प्रवासियों और अल्पसंख्यकों को राहत मिली है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में एक संघीय न्यायाधीश ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस विवादास्पद प्रयास पर रोक लगा दी है, जिसके तहत राज्यों को 'सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम' (SNAP) के लिए कठिन शर्तें मानने के लिए मजबूर किया जा रहा था। इस फैसले को प्रवासियों और कम आय वाले परिवारों के लिए एक बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित इन नई शर्तों में जेंडर विचारधारा, सख्त आव्रजन मानकों और निष्पक्ष पात्रता से जुड़ी मांगें शामिल थीं, जिन्हें अब अदालत ने फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका के 20 डेमोक्रेटिक राज्यों ने प्रशासन के इस कदम के खिलाफ मुकदमा दायर किया। इन राज्यों का तर्क था कि संघीय सरकार द्वारा थोपी जा रही ये शर्तें न केवल प्रशासनिक रूप से बोझिल हैं, बल्कि यह उन गरीब समुदायों को लक्षित करती हैं जो भोजन के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर हैं। न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रशासन को राज्यों पर ऐसी शर्तें थोपने का अधिकार नहीं है जो बुनियादी मानवीय सहायता के वितरण में बाधा उत्पन्न करती हों। यह घटनाक्रम भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और वैश्विक प्रवासी भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि यह मामला अमेरिका का है, लेकिन आव्रजन और सामाजिक सुरक्षा लाभों पर राजनीतिक रुख का असर अक्सर अन्य विकसित देशों की नीतियों पर भी पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग, जो अक्सर अपने परिवार के सदस्यों के लिए अमेरिका जैसे देशों में भविष्य देखते हैं, इस तरह के नीतिगत बदलावों पर पैनी नजर रखते हैं। अमेरिका में खाद्य सहायता कार्यक्रमों पर कड़े रुख का सीधा प्रभाव वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों और छात्रों पर पड़ सकता है, जो अक्सर आर्थिक संघर्ष के दौर में इन योजनाओं का सहारा लेते हैं। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की इन नीतियों का मुख्य उद्देश्य आव्रजन को हतोत्साहित करना और 'पब्लिक चार्ज' जैसे नियमों को और कड़ा बनाना था। यदि ये शर्तें लागू हो जातीं, तो कई कानूनी प्रवासियों को भी अपनी स्थिति खराब होने के डर से लाभ छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता। अदालत के इस हस्तक्षेप ने अस्थायी रूप से ही सही, उन लाखों लोगों को सुरक्षा प्रदान की है जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघीय सहायता पर निर्भर हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देता है। फिलहाल, राज्यों को यह छूट मिली है कि वे अपनी मौजूदा प्रणालियों के अनुसार स्नैप लाभों का वितरण जारी रख सकें। यह फैसला यह भी रेखांकित करता है कि कैसे न्यायपालिका नीतिगत बदलावों के दौर में मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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