राजनीति
अमेरिका में F-1 वीजा नियमों में बड़ा बदलाव: अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए खत्म होगी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' की सुविधा
ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 01:37 pm
अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए नियमों में सख्ती होने वाली है। 15 सितंबर 2026 से F-1 वीजा पर आने वाले छात्रों को अब एक निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा नियमों में एक बड़े बदलाव की घोषणा की है, जिसका सीधा असर वहां पढ़ रहे लाखों भारतीय छात्रों पर पड़ेगा। 15 सितंबर, 2026 से प्रभावी होने वाले इन नए नियमों के तहत, F-1 वीजा धारक छात्रों को अब 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) के बजाय एक निश्चित समय अवधि के लिए प्रवेश दिया जाएगा। वर्तमान प्रणाली में, छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम का पालन कर रहे हैं, लेकिन नई व्यवस्था इस अनिश्चितकालीन लचीलेपन को समाप्त कर देगी।
इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्र वीजा प्रणाली में जवाबदेही और सुरक्षा को बढ़ाना है। अब तक, 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' का मतलब था कि जब तक छात्र का आई-20 (I-20) फॉर्म वैध है और वह अपनी पढ़ाई जारी रख रहा है, उसे वीजा विस्तार के लिए बार-बार आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती थी। हालांकि, सितंबर 2026 के बाद, छात्रों को उनके पाठ्यक्रम की अनुमानित अवधि के आधार पर एक निश्चित 'एक्सपायरी डेट' दी जाएगी। यदि छात्र को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है, तो उसे औपचारिक रूप से वीजा विस्तार के लिए आवेदन करना होगा और अपनी पात्रता दोबारा सिद्ध करनी होगी।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार या बच्चे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही छात्र वीजा के लिए एक निश्चित समय सीमा की व्यवस्था लागू है, और अब अमेरिका भी इसी तरह के कड़े नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है। भारतीय छात्र, जो अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा समूह हैं, इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों पर प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा और उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान निरंतर आव्रजन (immigration) नियमों की निगरानी करनी होगी।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि निश्चित अवधि के प्रवेश से वीजा उल्लंघन और ओवरस्टे (निर्धारित समय से अधिक रुकना) के मामलों में कमी आएगी। इसके साथ ही, यह अधिकारियों को छात्रों की प्रगति पर बेहतर नजर रखने में मदद करेगा। हालांकि, छात्र संगठनों और शिक्षाविदों ने चिंता जताई है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अमेरिका को एक कम आकर्षक गंतव्य बना सकता है। विशेष रूप से शोध (research) और पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए, जिनका अध्ययन समय अक्सर अनिश्चित होता है, यह नियम काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
ICN24 के पाठकों को सलाह दी जाती है कि जो छात्र 2026 या उसके बाद अमेरिका में पढ़ाई की योजना बना रहे हैं, वे अपनी समय-सीमा और वित्तीय योजना को इन्हीं नियमों के अनुसार व्यवस्थित करें। वीजा विस्तार की प्रक्रिया में देरी होने पर छात्रों के कानूनी स्टेटस पर संकट आ सकता है, इसलिए भविष्य में अग्रिम योजना बनाना अनिवार्य होगा।
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