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अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का लद्दाख दौरा: गलवान संघर्ष के बाद पहली बार किसी उच्च अमेरिकी अधिकारी की यात्रा
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 11:39 pm
भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी लद्दाख के रणनीतिक दौरे पर हैं, जो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद किसी भी अमेरिकी शीर्ष राजनयिक की पहली ऐसी यात्रा है।
भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी इस समय लद्दाख के एक महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद किसी अमेरिकी शीर्ष राजनयिक की केंद्र शासित प्रदेश की यह पहली यात्रा है। गार्सेटी का यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके व्यापक भू-राजनीतिक निहितार्थ भी हैं, विशेष रूप से ऐसे समय में जब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अपनी इस यात्रा के दौरान राजदूत गार्सेटी तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से भी मुलाकात कर सकते हैं। यदि यह मुलाकात होती है, तो यह बीजिंग के लिए एक कड़ा संदेश होगा, जो दलाई लामा की गतिविधियों और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करता रहा है। अमेरिका ने हमेशा तिब्बती मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन किया है, और गार्सेटी की यह संभावित मुलाकात इसी नीति का विस्तार मानी जा रही है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और रणनीतिक संबंध अपने ऐतिहासिक शिखर पर हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच, वाशिंगटन और नई दिल्ली ने 'क्वाड' (QUAD) जैसे समूहों के माध्यम से अपने सहयोग को मजबूत किया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, जो क्वाड का एक प्रमुख सदस्य है, भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता का निरंतर समर्थन करता रहा है। लद्दाख में शांति और स्थिरता सीधे तौर पर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ी है, जो ऑस्ट्रेलिया के सामरिक हितों के लिए भी अनिवार्य है।
राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि गार्सेटी का लद्दाख जाना इस बात की पुष्टि करता है कि अमेरिका लद्दाख को भारत के अभिन्न अंग के रूप में देखता है और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सुरक्षा चिंताओं के साथ खड़ा है। इससे पहले, चीन ने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की यात्राओं पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके आंतरिक मामलों और क्षेत्रों में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप या आपत्ति की कोई जगह नहीं है।
इस यात्रा के दौरान गार्सेटी द्वारा कुछ स्थानीय विकास परियोजनाओं और सुरक्षा चौकियों का जायजा लेने की भी उम्मीद है। यह दौरा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजिंग इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है, क्योंकि यह दौरा सीधे तौर पर चीन की क्षेत्रीय संवेदनशीलता को प्रभावित करता है।
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