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H-1B वीजा शुल्क पर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला, भारतीय आईटी पेशेवरों को मिली बड़ी राहत

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 03:01 pm
H-1B वीजा शुल्क पर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला, भारतीय आईटी पेशेवरों को मिली बड़ी राहत

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने H-1B वीजा पर लगाए गए 100,000 डॉलर के अतिरिक्त शुल्क को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है, जिससे भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है।

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने भारतीय आईटी पेशेवरों और तकनीकी कंपनियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। बोस्टन स्थित संघीय न्यायाधीश ने ट्रम्प प्रशासन के उस विवादास्पद फैसले को रद्द कर दिया है, जिसके तहत नए H-1B वीजा पर 100,000 डॉलर का भारी-भरकम शुल्क लगाने का प्रस्ताव था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह शुल्क एक 'अवैध कर' की श्रेणी में आता है, जिसे लागू करने का अधिकार कांग्रेस ने कभी नहीं दिया था। यह निर्णय 8 जून को आया, जो उन हजारों भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, जो अमेरिकी कंपनियों में काम करने का सपना देखते हैं। गौरतलब है कि H-1B वीजा कार्यक्रम का सबसे अधिक लाभ भारतीय नागरिक उठाते हैं। ट्रम्प प्रशासन द्वारा प्रस्तावित यह शुल्क कंपनियों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया था, जिससे छोटे और मध्यम स्तर की कंपनियों के लिए भारतीय प्रतिभाओं को नियुक्त करना लगभग असंभव हो गया था। न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार के पास कानून की स्पष्ट अनुमति के बिना इस तरह का भारी वित्तीय शुल्क लगाने की शक्ति नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि आव्रजन नीतियों में बदलाव के नाम पर इस तरह के कर थोपना प्रशासनिक सीमाओं का उल्लंघन है। इस फैसले के बाद अब कंपनियों को पुराने शुल्क ढांचे के तहत ही वीजा आवेदन करने की अनुमति होगी, जिससे आवेदन प्रक्रिया की लागत में भारी कमी आएगी। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। हालांकि यह फैसला अमेरिकी आव्रजन नीति से संबंधित है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्किल्ड माइग्रेशन की प्रवृत्तियों का प्रभाव ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर भी पड़ता है। कई भारतीय पेशेवर जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत हैं, वे भविष्य के करियर विकल्पों के लिए अमेरिकी बाजार पर भी नजर रखते हैं। अमेरिका में वीजा नियमों का सरल होना अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती आदेश से न केवल भारतीय पेशेवरों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उन भारतीय आईटी फर्मों को भी संजीवनी मिलेगी जो अमेरिका में बड़े पैमाने पर परिचालन करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में वीजा नीतियों में सख्ती के कारण कई भारतीयों ने कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख किया था। अब इस राहत के बाद, अमेरिकी तकनीक क्षेत्र में फिर से भारतीय प्रतिभाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है। आगामी महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाइडन प्रशासन इस अदालती फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल, भारतीय समुदायों और उद्योग निकायों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग की जीत बताया है।
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