राजनीति
उत्तर प्रदेश: सीट बंटवारे को लेकर बढ़ी हलचल, निषाद और राजभर की भाजपा नेतृत्व से मुलाकात के क्या हैं मायने?
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 04:31 pm
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा तेज हो गई है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनावी संभावनाओं और उप-चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सहयोगी दलों के साथ समन्वय बैठाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ हालिया मुलाकातों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, इन मुलाकातों का मुख्य एजेंडा सीट बंटवारे का फार्मूला तय करना है। भाजपा नेतृत्व इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहता और छोटे दलों की नाराजगी मोल लेने के मूड में नहीं है। संजय निषाद और राजभर, दोनों ही अपने-अपने समुदायों में मजबूत पकड़ रखते हैं और पूर्वांचल क्षेत्र में इनका खासा प्रभाव है। इन नेताओं की मांग है कि उन्हें उन सीटों पर प्राथमिकता दी जाए जहां उनका वोट बैंक निर्णायक भूमिका में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पिछले चुनाव परिणामों से सीख लेते हुए इस बार सामाजिक समीकरणों को अधिक बारीकी से साधने की कोशिश कर रही है। निषाद पार्टी और सुभासपा जैसे दल भाजपा के लिए 'ओबीसी' (अन्य पिछड़ा वर्ग) मतों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संजय निषाद ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी सम्मानजनक सीटों की उम्मीद कर रही है, वहीं राजभर भी अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सीटों के लिए दबाव बना रहे हैं।
इस घटनाक्रम का महत्व केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के बीच भी भारत की आंतरिक राजनीति को लेकर गहरी रुचि रहती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे 'यूपी डायस्पोरा' के बीच इन गठबंधनों और राजनीतिक स्थिरता पर चर्चा आम है, क्योंकि राज्य की नीतियां सीधे तौर पर उनके परिवारों और निवेश को प्रभावित करती हैं।
फिलहाल, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इन मुलाकातों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सीटों के चयन और उम्मीदवारों की प्रोफाइल पर शुरुआती सहमति बन गई है। आने वाले हफ्तों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के बड़े नेताओं के साथ एक और दौर की बैठक होने की संभावना है, जिसके बाद आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
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