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ब्रिटेन: हिंदू मंदिर ने काउंसिल के खिलाफ खोला मोर्चा, इस्लामिक संगठन को जमीन बेचने के फैसले को हाईकोर्ट में दी चुनौती

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 12:31 am
ब्रिटेन: हिंदू मंदिर ने काउंसिल के खिलाफ खोला मोर्चा, इस्लामिक संगठन को जमीन बेचने के फैसले को हाईकोर्ट में दी चुनौती

पीटरबरो के भारत हिंदू समाज ने स्थानीय काउंसिल द्वारा मंदिर की जमीन एक इस्लामिक संगठन को बेचने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, इसे गैरकानूनी बताया है।

यूनाइटेड किंगडम के पीटरबरो (Peterborough) में एक महत्वपूर्ण कानूनी विवाद सामने आया है, जहां 'भारत हिंदू समाज' मंदिर ने स्थानीय नगर परिषद (सिटी काउंसिल) के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत मंदिर के 40 साल पुराने परिसर को एक इस्लामिक संगठन को बेचने की योजना बनाई गई है। यह मामला न केवल ब्रिटेन के हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में बसे भारतीय प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां सामुदायिक संपत्तियों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है। भारत हिंदू समाज, जो 1986 से रॉक रोड स्थित इस स्थल से संचालित हो रहा है, ने तर्क दिया है कि पीटरबरो सिटी काउंसिल का निर्णय 'गैरकानूनी' है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। यह मंदिर पूर्वी इंग्लैंड के कैंब्रिजशायर, नॉरफ़ॉक और लिंकनशायर जैसे क्षेत्रों में रहने वाले हिंदुओं के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। विवाद की जड़ इस साल फरवरी में काउंसिल द्वारा लिए गए उस फैसले में है, जिसमें संपत्ति का फ्रीहोल्ड 'यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन' (UKIM) को बेचने की बात कही गई थी। अदालत में मंदिर का पक्ष रखते हुए बैरिस्टर टोबी फिशर ने स्पष्ट किया कि यह चुनौती UKIM या उनकी बोली के खिलाफ नहीं है, बल्कि काउंसिल की निर्णय लेने की प्रक्रिया में मौजूद गंभीर खामियों के खिलाफ है। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि वे 2017 से काउंसिल के साथ इस साइट को खरीदने के लिए बातचीत कर रहे थे। हालांकि, 2023 में UKIM से प्रस्ताव मिलने के बाद, काउंसिल ने अंतिम बोलियां आमंत्रित कीं। बताया गया है कि UKIM ने किसी भी नकद प्रस्ताव से पांच प्रतिशत अधिक भुगतान करने की पेशकश की थी। मंदिर के वकीलों ने तर्क दिया कि काउंसिल के अधिकारियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी गलतियां कीं और पार्षदों ने बिना उचित जांच के उन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, समानता अधिनियम 2010 (Equality Act 2010) के तहत काउंसिल के दायित्वों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। मंदिर का कहना है कि यदि यह परिसर उनके हाथ से निकलता है, तो उनके पास जाने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं है, जबकि UKIM के पास पहले से ही ब्रिटेन भर में दर्जनों केंद्र मौजूद हैं। दूसरी ओर, पीटरबरो सिटी काउंसिल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। काउंसिल की वकील कैथरीन रोलैंड्स ने अदालत को बताया कि बोली प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष थी। उन्होंने तर्क दिया कि काउंसिल मंदिर की महत्ता से वाकिफ थी और कई वर्षों के संवाद के बाद ही यह निर्णय लिया गया। फिलहाल जस्टिस मॉरिस इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं और लिखित फैसला आने वाले दिनों में आने की उम्मीद है। यह मामला दुनिया भर में रह रहे हिंदू समुदाय के लिए मिसाल बन सकता है कि कैसे सार्वजनिक संपत्तियों के निपटान के दौरान धार्मिक आस्था और सामुदायिक विरासत की रक्षा की जानी चाहिए।
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