टेक्नोलॉजी
यूएई का बड़ा फैसला: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी, आयु सत्यापन हुआ अनिवार्य
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:57 pm

संयुक्त अरब अमीरात ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाते हुए 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने और आयु सत्यापन अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकार ने बच्चों की मानसिक और डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार, अब 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। संघीय डिक्री-कानून के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद 15 साल से कम उम्र के सभी सक्रिय खातों को तत्काल प्रभाव से बंद करें। यह कदम वैश्विक स्तर पर बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है।
यूएई के दूरसंचार और डिजिटल सरकार नियामक प्राधिकरण (TDRA) ने स्पष्ट किया है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए कठोर आयु सत्यापन (Age Verification) तंत्र लागू करना अनिवार्य होगा। कंपनियों को न केवल नए पंजीकरण के समय आयु की जांच करनी होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मौजूदा उपयोगकर्ता निर्धारित आयु सीमा से कम न हों। 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के लिए भी नियमों को सख्त किया गया है, जहां उनके खातों के लिए माता-पिता की सहमति और निगरानी को अनिवार्य बनाया जा सकता है।
यह घटनाक्रम भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया भी वर्तमान में इसी तरह के कानून पर विचार कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया के लिए 16 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है। यूएई का यह निर्णय उन हजारों भारतीय परिवारों को भी प्रभावित करेगा जो खाड़ी देशों में रहते हैं और जिनका गहरा नाता भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों से है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों द्वारा उठाए जा रहे ये कदम भविष्य में वैश्विक डिजिटल नीतियों के लिए एक मानक स्थापित करेंगे।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों में साइबर बुलिंग, प्राइवेसी के उल्लंघन और मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। यूएई के अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि इस कानून का उद्देश्य बच्चों को तकनीक से दूर करना नहीं, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और विनियमित ऑनलाइन वातावरण प्रदान करना है। उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, जो यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है।
निष्कर्षतः, यूएई की यह पहल डिजिटल युग में बच्चों के संरक्षण की दिशा में एक साहसी कदम है। जहां एक ओर तकनीकी दिग्गज कंपनियां इन नियमों को लागू करने की चुनौतियों पर चर्चा कर रही हैं, वहीं अभिभावकों और शिक्षाविदों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में देखें तो यह स्पष्ट है कि दुनिया भर की सरकारें अब बिग टेक कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए कमर कस चुकी हैं।
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