राजनीति
ट्रंप के 'महा-सम्मेलन' को लगा झटका, रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने बनाई दूरी
ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 08:31 am

डलास में होने वाले ट्रंप के पहले मिडटर्म सम्मेलन में शामिल होने से कई रिपब्लिकन उम्मीदवार कतरा रहे हैं, जिससे उनकी भविष्य की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
डलास में आयोजित होने वाले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले रिपब्लिकन मिडटर्म सम्मेलन को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। जिसे 'ट्रम्पापालूज़ा' (Trumpapalooza) का नाम दिया गया है, उस भव्य आयोजन का उद्देश्य पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरना और आगामी चुनावों के लिए एकजुटता दिखाना था। हालांकि, ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आयोजन अब एक बड़ी मुश्किल में फंसता नज़र आ रहा है क्योंकि कई प्रमुख रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने इस मंच पर ट्रंप के साथ खड़े होने से फिलहाल दूरी बना ली है।
यह स्थिति ट्रंप के उस प्रभाव पर सवालिया निशान लगाती है, जिसे वे पार्टी के भीतर निर्विवाद मानते रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर इस समय एक अजीब सी खामोशी देखी जा रही है। कई रणनीतिकारों का मानना है कि जो उम्मीदवार कड़े मुकाबले वाले राज्यों (Swing States) से चुनाव लड़ रहे हैं, वे ट्रंप की विवादास्पद छवि से खुद को थोड़ा अलग रखना चाहते हैं। उन्हें डर है कि ट्रंप के साथ दिखने से वे उन मध्यममार्गी या निर्दलीय मतदाताओं को खो सकते हैं, जो चुनाव परिणाम बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सितंबर में होने वाले इस सम्मेलन की तैयारी तो ज़ोरों पर है, लेकिन मुख्य वक्ताओं की सूची में उम्मीदवारों के नाम न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, उम्मीदवारों का यह फैसला पूरी तरह से चुनावी गणित पर आधारित है। वे नहीं चाहते कि ट्रंप के पुराने बयानों या हालिया कानूनी विवादों की छाया उनके व्यक्तिगत अभियान पर पड़े। यह 'साइलेंट मोड' रिपब्लिकन पार्टी के भीतर चल रहे वैचारिक संघर्ष को भी दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए अमेरिका की यह राजनीतिक उठापटक विशेष महत्व रखती है। अमेरिका की विदेश नीति, व्यापारिक संबंध और इमिग्रेशन कानून सीधे तौर पर वैश्विक भारतीय प्रवासियों को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से, एच-1बी (H-1B) वीजा और व्यापारिक गठबंधनों (जैसे Quad) के भविष्य पर ट्रंप की नीतियों का गहरा असर रहा है। ऐसे में, यदि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रंप का कद कम होता है या पार्टी नई दिशा में मुड़ती है, तो इसका असर ऑस्ट्रेलिया-भारत-अमेरिका के त्रिकोणीय संबंधों पर भी पड़ेगा।
निष्कर्ष के तौर पर, 'ट्रम्पापालूज़ा' ट्रंप के लिए केवल एक रैली नहीं बल्कि उनकी शक्ति का प्रदर्शन था। यदि उम्मीदवार इसी तरह दूरी बनाए रखते हैं, तो यह न केवल ट्रंप के लिए बल्कि मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की समग्र रणनीति के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित होगी। आने वाले हफ़्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप इन उम्मीदवारों को मनाने में सफल होते हैं या फिर पार्टी के भीतर एक नई नेतृत्व की तलाश तेज़ होती है।
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